नई दिल्ली | हाल के दिनों में देश के अन्दर भीड़ की बर्बरता के कई मामले सामने आये है. कभी मजहब तो कभी गौरक्षा के नाम पर भीड़ ने कई लोगो को मौत के घाट भी उतारा है. इस तरह की घटनाए रोजाना बढ़ रही है जो देश के लिए बड़ी चिंता का विषय है. यही वजह है की सभी विपक्षी दलों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी भी इन घटनाओं पर चिंता व्यक्त कर चुके है. लेकिन फिर भी भीड़ के रूप में हो रही बर्बरता रुकने का नाम नही ले रही है.

अब इस मामले में राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी ने भी चिंता जताई है. उन्होंने ऐसे मामलो पर रोक लगाने के कहा और सरकार से पुछा की क्या इसे लेकर पूरी तरह सतर्क है. शनिवार को नेशनल हेराल्ड न्यूज़ पेपर के स्मारक संस्करण की लॉन्चिंग पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा की जब बेकाबू भीड़ खुद ही सजा देने पर उतारू हो जाए और ऐसे मामले बढ़ जाए तो हमें उसे रोकना चाहिए.

राष्ट्रपति ने सवाल की मुद्रा में कहा की क्या हम इसके लिए तैयार है? वक्त आ गया है जब हम देखे की क्या हम इसे लेकर पूरी तरह सतर्क है? मैं जागरूकता की बात नही कर रहा हूँ, बल्कि मैं यह कह रहा हूँ की क्या हम देश के मूल सिद्धांतो को बचाने के लिए पूरी तरह सतर्क है? राष्ट्रपति का यह बयान हाल ही में हुई उन घटनाओं के साथ जोड़कर देखा जा रहा है जिसमे हिंसक भीड़ ने कई लोगो को मौत के घाट उतार दिया.

राष्ट्रपति के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी इस मौके पर अपने विचार रखे. उन्होंने नसीहत भरे लब्जो में कहा की बड़े और महान नेताओं को एकता , शांति और इन्साफ के रास्ते पर चलना चाहिए, न की बंटवारे और संघर्ष के रास्ते पर. ऐसे समय में जब देश को मजहब के नाम पर बांटा जा रहा है तब हमें उन महान नेताओं की और देखना चाहिए जो अपनी महत्तवकांशा छोड़ देश की सुरक्षा और आत्मा की रक्षा के लिए आगे बढ़ गए. इस कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, प्रियंका गाँधी और अन्य कांग्रेसी नेता शामिल हुए.


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