नई दिल्ली | दो साल पहले लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया था की आजादी के 70 सालो बाद भी देश के करीब साढ़े 18 हजार गाँव में बिजली नही पहुंची है. मोदी ने उस समय वादा किया था की हम मई 2018 तक सभी गाँव का विधुतीकरण कर देंगे. मोदी के वादे पर अमल करते हुए बिजली मंत्रालय ने मई 2017 में दावा किया की करीब साढ़े 13 हजार गाँव का विधुतीकरण कर दिया गया है.

बिजली मंत्री पियूष गोयल ने तब कहा था की हमने 13516 गाँव का विधुतीकरण कर दिया है. करीब 944 गाँव में आबादी नही है और बाकी बचे गाँव में मई 2018 तक बिजली पहुंचा दी जायेगी. इस हिसाब से देखे तो बिजली मंत्रालय काफी तेज गति से अपने टारगेट के नजदीक पहुँचता दिखाई दे रहा है. लेकिन नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने इस सभी दावों की पोल खोल कर रख दी है.

नीति आयोग ने गाँव में किये गए विधुतीकरण को लेकर एक रिपोर्ट पेश की है जिसे साफ़ तौर पर कहा गया की सरकार जिन गाँव में विधुतीकरण पूरा करने का दावा कर रही है वो गलत है क्योकि अभी भी काफी गाँव में लोग लालटेन से ही काम चला रहे है. जबकि जिन गाँव में विधुतीकरण हुआ भी है वहां के कई परिवारों को इस योजना का लाभ नही मिला है. इसका मतलब साफ़ है की विधुतीकरण के मामले में सरकार केवल कागजी दावे कर रहे है.

नीति आयोग ने राष्ट्रिय उर्जा नीति की अपनी रिपोर्ट में उपरोक्त बाते कही. इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी बताया गया की बिजली मंत्रालय ने केवल गाँव का विधुतीकरण करने का लक्ष्य रखा , गाँव में रहने वाले परिवारों का नही. क्योकि ऐसे काफी गाँव है जहाँ विधुतीकरण होने के बावजूद परिवार बिजली से वंचित है. नीति आयोग ने बताया की देश में 30.4 करोड़ लोग बिजली से वंचित है जबकि 50 करोड़ लोग अभी भी खाने बनाने के लिए जैविक इंधन पर भी निर्भर है.


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