नई दिल्ल्ली | पिछले तीन सालो में देश की राजनीती में बहुत बदलाव देखने को मिला है. राजनेताओ के लिए अपनी मर्यादाओ की सीमओं को लाँघ देना अब एक शगल सा बन चूका है. राजनीती में बाहुबल और धनबल को बोलबाला हो गया है. हालाँकि ये सब पहले की राजनीती में भी शामिल था लेकिन हाल फ़िलहाल में इस तरह की राजनीती रिकॉर्ड बनाते दिख रही है. गुजरात राज्यसभा चुनाव में जो कुछ भी हुआ उससे राजनीतिक दल शर्मिंदा हो या न हो लेकिन देश का लोकतंत्र जरुर शर्मिंदा हुआ है.

इस तरह राजनीतिक दलों में कम होती नैतिकता जरुर एक चिंता का विषय है. इस मुद्दे पर चुनाव आयुक्त भी चिंतित दिख रहे है इसलिए उन्होंने हाल की घटनाओं पर बेहद ही कड़ी टिपण्णी की है. उन्होंने कहा की आजकल के राजनितिक दल , चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है. इस दौरान उन्होंने विधायको और सांसदों की होने वाली खरीद फ़रोख पर भी तंज कसा.

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गुजरात राज्यसभा चुनावो में कांग्रेस के पक्ष में फैसले लेने के करीब 10 दिन बाद चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा की अब राजनीती में आ रही गिरावट एक सामान्य बात है. लोकतंत्र तभी फल फूलता है जब चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हो, लेकिन ऐसा लगता है की राजनितिक दल सबसे ज्यादा इस बात पर जोर देता है की उसे हर हाल में चुनाव जीतना है. ऐसे में वो खुद को नैतिक आग्रह से भी मुक्त रखता है.

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एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा आयोजित कार्यक्रम “कंसल्टेशन ऑन इलेक्टोरल एंड पोलिटिकल रिफॉर्म्स” में बोलते हुए ओपी रावत ने कहा की अब विधयाको-सांसदों की खरीद फरोख्त एक स्मार्ट पोलिटिकल मैनेजमेंट माना जाता है. जबकि पैसे और सत्ता के दुरूपयोग इत्यादि को संसाधन माना जाता है. उन्होंने आगे कहा की चुनाव जीतने वाले ने कोई पाप नहीं किया होता क्योंकि चुनाव जीतते ही उसके सारे पाप धुल जाते हैं.

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इन सबको अब एक सामान्य स्वभाव बताते हुए उन्होंने कहा की जो लोग बेहतर कल और बेहतर चुनाव की उम्मीद करते है उन्हें राजनितिक दलों , मीडिया , राजनेताओ , सिविल सोसाइटी , संवैधानिक संस्थाओ के लिए एक अनुकरणीय व्यव्हार का मापदंड तय करना होगा. इसके अलावा ओपी रावत ने पेड न्यूज़ पर भी अपने विचार रखे. उन्होंने कहा की इस चीज को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए.


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