इलाहाबाद | उत्तर प्रदेश में करीब 14 साल बाद बीजेपी सत्ता में आई है. अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनावो में बीजेपी ने प्रचंड जीत के साथ दो तिहाई से भी ज्यादा बहुमत हासिल किया. बीजेपी को 403 में से 325 सीटे मिली. जहाँ बीजेपी की प्रचंड जीत से हर कोई चकित था वही बीजेपी के अन्दर भी इतनी बड़ी जीत को लेकर मंथन चल रहा था. लोगो की जनापेक्षाओ को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री पद के लिए किसी योग्य उम्मीदवार को चुनना बड़ी चुनौती.

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इसलिए काफी मंथन के बाद गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गयी. इसके अलावा केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाया गया. सूबे में सरकार बने करीब दो महीने हो चुके है. इस दौरान योगी ने कई अहम् फैसले भी लिए है. लेकिन योगी के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है की वो न तो विधानसभा के और न ही विधान परिषद के सदस्य है.

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कुछ ऐसी ही स्थिति केशवा प्रसाद मौर्या की है. दरअसल नियम यह कहता है की मुख्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री बनने के लिए व्यक्ति को राज्य के किसी एक सदन का सदस्य होना अनिवार्य है. अगर ऐसा नही है तो छह महीने के अन्दर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा. हालाँकि योगी और केशव के पास अभी समय है लेकिन बीजेपी नेतृत्व चाहता है की दोनों सदस्य राष्ट्रपति चुनावो के बाद अपने पद से इस्तीफा दे.

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योगी आदित्यनाथ के इसी फैसले के खिलाफ संजय शर्मा नामक व्यक्ति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर योगी और केशव प्रसाद को उनके पद से बर्खास्त करने की मांग की गयी है. याचिका में यही दलील दी गई है की दोनों ही अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नही है. हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अटोर्नी जनरल को नोटिस भेजा है क्योकि इस तरह की सुनवाई बिना अटोर्नी जनरल के नही हो सकती.


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