16 वर्षों से जेल की सलाख़ों के पीछे अपने जीवन का सबसे क़ीमती वक़्त गंवाने वाले पीएचडी के छात्र गुलज़ार को हाल ही में आगरा की एक अदालत ने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों से बा-इज्ज़्त बरी कर दिया है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, अदालत ने गुलज़ार वानी को बम धमाकों की योजना बनाने के आरोपों से बरी कर दिया।

आरोपी को क़ानूनी सहायता प्रदान करने वाली संस्था जमीअते उलेमा के मुताबिक़, 9 अगस्त सन् 2000 को आगरा के सदर बाज़ार स्थित एक घर में बम विस्फोट हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने पीएचडी के छात्र गुलज़ार वानी को गिरफ़्तार कर लिया और उस पर आरोप लगाया कि वह स्वतंत्रता दिवस से पहले आगरा में बम धमाकों की साज़िश रच रहा था।

पुलिस ने आरोप लगाया कि गुलज़ार अपने अन्य साथियों के साथ बम बनाने में व्यस्त था कि अचनाक बम विस्फ़ोट हो गया। गुलज़ार के वकील आरिफ़ अली ने बताया कि अभियोजन पक्ष अदालत में यह साबित करने में विफ़ल रहा कि आरोपी का इस घटना से कोई संबंध था।

इस मामले के दो अन्य आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं। जमीअते उलेमा का कहना है कि गुलज़ार के खिलाफ़ पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया था, लेकिन 16 साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी का इस मामले से कोई संबंध था।


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