नई दिल्ली | 2014 में हुए लोकसभा चुनावो के दौरान नरेन्द्र मोदी और पूरी बीजेपी ब्रिगेड ने महंगाई को एक बड़ा मुद्दा बनाया था. देश के हर एक कोने पर हमें ‘बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार’ के पोस्टर लगे हुए दिखाई दिए. लगातार बढ़ रहे पेट्रोल और डीजल के दामो ने लोगो के अन्दर आक्रोश पैदा कर दिया था जिसका नरेन्द्र मोदी और बीजेपी ने पूरा फायदा उठाया. उस समय पेट्रोल की कीमत 73.60 थी.

लेकिन इसकी वजह अन्तराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रही वृद्धि थी. SMC ग्लोबल के रिसर्च हेड डॉ रवि सिंह ने बताया कि 1 जुलाई, 2014 को कच्चे तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल थी. जो अगस्त में कुछ घटकर 106 डॉलर पर पहुँच गयी. लेकिन इस मोदी सरकार बनने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा गिरावट देखी गयी है. एक समय ऐसा भी आया जब अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 25 डॉलर तक पहुँच गयी.

और पढ़े -   NDTV ने BSE को खत लिखकर चैनल बिकने की खबर को किया ख़ारिज कहा, नही बदला स्वामित्व

लेकिन इस गिरावट का फायदा देश की जनता तक नही पहुंचा. एसएमसी के मुताबिक फ़िलहाल कच्चे तेल की कीमत 54 डॉलर चल रही है. लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है की देश के कई राज्यों में पेट्रोल की कीमत 80 रूपए तक पहुँच गयी है. आखिर यह कैसा गणित है की कच्चे तेल की कीमत गिरने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि हो रही है. दरअसल सरकार ने पिछले महीने तेल कंपनियों को तेल की कीमतों में रोजाना बदलाव करने का अधिकार दे दिया था.

और पढ़े -   रोहिंग्या मुस्लिमो पर बोले मौलाना, हम 72 भी लाखो पर भारी, कोई माँ का जना नही जो मुसलमानों को बंगाल से निकाल दे

करीब तीन महीने से देश में पेट्रोल और डीजल के दामो में रोजाना परिवर्तन हो रहा है. लेकिन जुलाई महीने से एक आध दिन को छोड़कर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रोजाना बढ़ोतरी की जा रही है. इसका नतीजा यह हुआ की जुलाई से अब तक पेट्रोल की कीमतों में साढ़े सात रूपए की वृद्धि हो चुकी है. चूँकि अब तेल की कीमतों में हुई वृद्धि की घोषणा नही की जाती इसलिए देश में इसको लेकर कोई हो हल्ला भी नही हो पाता.

इसके अलावा मीडिया में भी इस खबर को ज्यादा प्रमुखता नही मिल रही है. ऐसा इसलिए क्योकि यूपीए सरकार के समय तेल की कीमतों में वृद्धि होने से महंगाई बढ़ जाती थी जबकि मोदी सरकार आने से यह थ्योरी भी बदल चुकी है. बताते चले की फ़िलहाल सरकार को एक लीटर पेट्रोल की कीमत 31 रूपए प्रति लीटर पड़ती है. जिस पर केंद्र और राज्य सरकार के टैक्स जुड़ने के बाद पेट्रोल बाजार में 80 रूपए लीटर बिक रहा है. पिछले तीन सालो में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की एक्साइज में कई गुना बढ़ोतरी की है. जहाँ पेट्रोल पर पहले 10 रूपए एक्साइज ड्यूटी लगती वही अब यह बढ़कर 22 रूपए हो चुकी है.

और पढ़े -   हिन्दू महासभा ने मोदी सरकार को लिया आड़े हाथो कहा, हम सरकार बनाना जानते है तो गिराना भी

Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE