दिल्ली के विकासपुरी इलाक़े में डेंटिस्ट पंकज नारंग की पीट-पीटकर हत्या करने की घटना को लेकर सोशल मीडिया में ज़बर्दस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग कर रहे हैं। आलम ये है कि शनिवार को फ़ेसबुक पर #DrPankajLynched ट्रेंड करने लगा।

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लेकिन हत्या की इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश भी की जा रही है। कई लोगों को लगता है कि पंकज को मारने वाले लोग मुस्लिम समाज के हैं। इसी के चलते इस हत्या को एक डॉक्टर की हत्या नहीं, बल्कि एक ‘हिंदू की हत्या’ के रूप में पेश किया जा रहा है। आलम ये है कि आरोपियों को ‘बांग्लादेशी मुसलमान’ तक बता दिया गया है।

हम इस घटना से संबंधित अभी तक का सबसे विश्वसनीय पक्ष आपके सामने रखेंगे, लेकिन पहले देखें कुछ मिसालें जो इस हत्या को सांप्रदायिक रंग देती नज़र आती हैं,

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इस तस्वीर को हिंदू नैशनलिस्ट नाम की प्रोफ़ाइल से पोस्ट किया गया है। इसमें लिखा है, ‘दिल्ली में 35 बांग्लादेशी मुस्लिम ने डॉ. नारंग को पीट-पीटकर मार डाला…दादरी पर चीखने वाली टीवी मीडिया चुप मरी है…इतना शेयर करो कि आज शाम को ही टीवी में आ जाए…क्या डॉ. नारंग को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए?’

तस्वीर के साथ हिंदू नैशनलिस्ट ने इस पूरी घटना का विश्लेषण कर आरोपियों को ‘जिहादी’ तक बता डाला है। नीचे की तस्वीर में देखें, वह विश्लेषण क्या है। यहाँ क्लिक करके भी आप इसे पढ़ सकते हैं।

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कई लोगों ने ऐसी बातों पर यक़ीन कर लिया है। वे इस घटना की तुलना दादरी घटना से कर मीडिया की भी कड़ी आलोचना कर रहे हैं। इन पोस्ट्स में कहीं आरोपियों को मुस्लिम बताने की ज़िद है तो कहीं आरोपियों की संख्या अपने-अपने हिसाब से तय की  जा रही है। देशवासी नाम के ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट में भी पंकज को हिंदू डॉक्टर कहा गया है।

twitter

अब हम बात करते हैं कि इस घटना से संबंधित अभी तक के सबसे विश्वसनीय  तथ्य की।

दिल्ली पुलिस में अडिशनल डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने ट्वीट कर इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहीं ग़लतफ़हमियों को दूर किया है। देखिए, उन्होंने क्या कहा है,

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मोनिका ने लिखा है, ‘विकासपुरी के डॉक्टर की हत्या के 9 आरोपियों में से चार नाबालिग़ हैं। इसमें धार्मिक ऐंगल बिल्कुल नहीं है, जैसा कुछ लोगों द्वारा बताया गया था। हमारी अपील है कि शांति बनाए रखें।’ एक और ट्वीट कर मोनिका ने कहा, ‘9 आरोपियों में से 5 आरोपी हिंदू हैं। जिन दो लोगों ने पहले झगड़ा किया उनमें से एक हिंदू था। मुस्लिम आरोपी यूपी के हैं, न कि बांग्लादेश के।’

दिल्ली पुलिस की अधिकारी होने के नाते मोनिका भारद्वाज के बताए गए तथ्यों और अपील पर लोगों को ग़ौर करने की ज़रूरत है। इस मामले के एक मुख्य आरोपी का नाम नसीर है। लेकिन केवल इसी के चलते पूरे मामले को ‘मुस्लिमों द्वारा हिंदू की हत्या’ बताना समाज के लिए बेहद ख़तरनाक है। (NBT)


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