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नई दिल्ली: पठानकोट हमले पर पीएम नरेंद्र मोदी चौतरफा घिर गए हैं. कांग्रेस ने पूछा है कि किस भरोसे पर लाहौर गए थे? सरकार में साथ शिवसेना ने मोदी-शरीफ की मुलाकात पर ही सवाल उठा दिए हैं. सवाल ये है कि जिस वक्त जवान आतंकियों से लोहा ले रहे हैं तब यहां दिल्ली में बैठकर राजनीति करना सही है?

पंजाब के पठानकोट में जवानों की बंदूकों तनी हैं तो ग्राउंड जीरो से साढ़े चार सौ किलोमीटर दूर दिल्ली में बयानों की बंदूकें चल रही हैं. कांग्रेस ने मोदी सरकार से चार सवाल पूछे हैं .

एनएसए से ऐसी कार्रवाई पर बात हुई थी ?
किस भरोसे पर लाहौर गए ?
पीएम को सेना-ISI के समर्थन का पता था ?
पाक NSA के नहीं होने का मतलब क्यों नहीं निकाला?

कांग्रेस ऐसे माहौल में पाकिस्तान से बातचीत के पक्ष में नहीं है. लेकिन सरकार ने बातचीत रद्द होने को लेकर कोई संकेत नहीं दिये हैं. कांग्रेस के बयानों को सरकार गैर जिम्मेदार बता रही है.

सरकार के खिलाफ विरोध की आवाज कांग्रेस तक नहीं रह गई है. सरकार की सहयोगी शिवसेना ने भी मोदी के लाहौर दौरे को पठानकोट हमले का कारण बताया है. सामना में शिवसेना ने लिखा है कि सिर्फ 6-7 आतंकियों ने हमारे खिलाफ युद्ध का एलान किया है. जिस बड़ी फौज का हम ढोल बजाते रहते हैं उस ढोल को फोड़ने वाला ये मामला है. सिर्फ छह सनकी आतंकियों ने हिंदुस्तान की इज्जत तार-तार कर दी. रक्षा मंत्री, पीएम वगैरह लोग सबक लें. पठानकोट का बदला लेने वाले हम नहीं होंगे तो गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर शस्त्र प्रदर्शन का कोई मतलब नहीं है. शरीफ के साथ चाय-पान हमारे पीएम का निजी विषय है. चाय के बदले में सात जवान शहीद हो गए.

पीएम नरेंद्र मोदी पिछले महीने की 25 तारीख को पाकिस्तान गए थे. लेकिन हफ्ते भर के भीतर ही आतंकियों ने पठानकोट पर हमला कर दिया.


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