योग गुरु रामदेव की कंपनी पतंजलि द्वारा ईसाई समुदाय के धार्मिक चिन्ह पवित्र क्रॉस के इस्तेमाल पर ईसाई समुदाय भड़क उठा हैं. इंडियन क्रिश्चियन वायस (आईसीवी) ने मंगलवार को रामदेव को चेतावनी देते हुए विज्ञापन वापस लेने को कहा हैं.

आईसीवी के अध्यक्ष अब्राहम मथाई ने कहा, “ईसाई धर्म के प्रतीक पवित्र क्रॉस के इस तरह के चित्रण पर हम कड़ी आपत्ति जताते हैं. हम महसूस करते हैं कि एक खास अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए यह बाबा रामदेव का कार्यक्रम है. हम मांग करते हैं कि यह व्यावसायिक विज्ञापन सभी सार्वजनिक प्रक्षेत्र से तुरंत वापस लिया जाए.”

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उन्होंने आगे कहा कि रामदेव के विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के आह्वान से ईसाई समुदाय को आपत्ति नहीं है, लेकिन भारत में ब्रिटिश शासन को दर्शाने के लिए ‘पवित्र क्रॉस’ के इस्तेमाल से समुदाय नाखुश है. मथाई ने कहा कि भावनाओं को भड़काने वाली इस तरह की बातों से निश्चित रूप से चर्चो और ईसाई संस्थानों पर हमले बढ़ेंगे.इस सबंध में आईसीवी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य संबद्ध अधिकारियों को पत्र लिख रहा है.

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गौरतलब रहें कि विज्ञापन में आजादी से पहले स्वदेशी आन्दोलन की एक श्वेत और श्याम कतरन दिखाई जाती है और अचानक भारत के मानचित्र के साथ तीन दिशाओं की ओर इंगित तीन क्रॉस को बड़ा कर दिखाया जाता है. तीनों क्रास के बीच में ई, आई और सीओ शब्द दिखाए जाते हैं जो ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रतिनिधित्व करते हैं,


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