नई दिल्ली: छोटी बच्चियों से बलात्कार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि संसद इस मामले और कठोर कानून बनाए। हालांकि कोर्ट ने दोषियों को नपुंसक बनाने को लेकर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।

बच्चियों के बलात्कारियों को कठोरतम सजा देने के कानून पर विचार करे संसद : सुप्रीम कोर्ट

दरअसल महिला वकीलों की ओर से याचिका दायर की गई थी कि छोटी बच्चियों से रेप के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। खासतौर पर 6 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामले ज्यादा हो रहे हैं। देश में बच्चियों से रेप के मामले में अलग से कोई कानून नहीं है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में केंद्र को निर्देश दिए जाएं और कहा जाए कि समाज में बड़ा संदेश देने के लिए ऐसे मामलों में दोषी को नपुंसक बनाने तक का प्रावधान हो।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी की राय मांगी। रोहतगी ने केंद्र सरकार की ओर से दलील दी कि बेशक बच्चियों से रेप के मामले घृणित हैं, लेकिन किसी सभ्य समाज में इस तरह की सजा का प्रावधान नहीं रखा जा सकता। किसी मामले में कितनी सजा हो, ये तय करने का काम सुप्रीम कोर्ट को संसद पर छोड़ देना चाहिए।

इस सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि संसद ऐसे मामलों में विचार करे कि बच्चियों से रेप करने पर अलग से कठोर कानून हो। लेकिन कोर्ट ने दोषी को नपुंसक बनाने वाली याचिका को सुनने से इनकार कर दिया। साभार: NDTV

 


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