1994 में पाकिस्तान से ब्याह कर रामपुर आईं अफ़्शीन और उनके शौहर मुर्तजा ख़ान खुश हैं क्योंकि 20 साल बाद अफ़्शीन को भारत की नागरिकता मिली है. मुर्तजा ख़ान कहते हैं, “कराची में उनकी ससुराल के लोग भी बहुत खुश हैं क्योंकि सात साल बाद अफ़्शीन पाकिस्तान जा पाएंगी.”

गत 30 दिसंबर को रामपुर के नगर मजिस्ट्रेट ने अफ़्शीन को भारतीय नागरिक होने का प्रमाणपत्र सौंप दिया गया. भारतीय नागरिकता मिलने की प्रक्रिया में अफ़्शीन को 2007 में अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट लौटाना पड़ा था, जिसके बाद उनका मायके जाना बंद हो गया था.

2008 में पाकिस्तानी दूतावास ने उनकी पाकिस्तानी नागरिकता ख़त्म होने का पत्र दिया, जिसके बाद यह काम आसान हो पाया. मुर्तजा ख़ान ने 2000 के अंत में अफ़्शीन की नागरिकता बदलने की अर्ज़ी दी थी. उनके मुताबिक़ “नागरिकता मिलने में लंबा वक़्त लगता है.” इस बीच लॉन्ग टर्म वीज़ा सुविधा के सहारे काम चलाना पड़ता था.

रामपुर में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के पुलिस अधिकारी इरफ़ान अली के अनुसार अभी वहां 36 पाकिस्तानी महिलाएं हैं, जिनकी नागरिकता की अर्ज़ी पर फ़ैसला होना बाक़ी है. इनमें एक हिंदू है. इरफ़ान अली ने बीबीसी को बताया, “इनकी नागरिकता के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया चल रही है.”

इसमें से कुछ मामले 1979 से लंबित हैं.

कानपुर में 1988 से रह रहीं कराची की शकीला बानो को भी उम्मीद है कि जल्द ही भारतीय नागरिकता की उनकी भी अर्ज़ी मंज़ूर कर ली जाएगी. 1989 में कानपुर के मुन्ना बाबू से हुई शादी के बाद शकीला भी लॉन्ग टर्म वीज़ा की बदौलत भारत में रह रही हैं.

शकीला के पति मुन्ना ने बताया कि शकीला ने जुलाई में नागरिकता बदलने की अर्ज़ी दी थी. “कागज़ों में कुछ ग़लती हो गई थी जिसकी वजह से इतनी देर हो गई. फीस भी 10000 रुपए हो गई है.”

नागरिकता मिलने की उम्मीद पर मुन्ना ने बताया कि उनको अख़बारों से पता चला कि शकीला के सारे कागज़ात सही पाए गए हैं और अब जल्द ही नागरिकता मिलनी चाहिए. साभार: बीबीसी हिंदी


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