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बुधवार को राज्य सभा में सरकार की और से विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने नोटबंदी के फैसले को राष्ट्रहित में बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम उठाने के लिए प्रधानमंत्री पूरी तरह अधिकृत हैं. अध्यादेश लाने की कोई जरूरत नहीं है.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने नोटबंदी के बारे में विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर राज्यसभा में हुई चर्चा के दौरान कहा कि भ्रष्टाचार, काला धन और आतंकवाद पर लगाम कसने के उद्देश्य से 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य करने के मोदी सरकार के फैसले का देश ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा, ‘लेकिन कुछ लोगों का इस बारे में चिंतित होना स्वाभाविक भी है.

उन्होंने आगे कहा कि ‘कुल मुद्रा का 86 प्रतिशत 500 और 1,000 रुपये के नोट हैं. आरबीआई ने पाया कि वर्षों से 50 प्रतिशत मुद्रा उसकी तिजोरी में नहीं आए हैं और अर्थव्यवस्था में उपयोग नहीं किए जा रहे हैं. इसलिए, धन की बड़ी राशि कहीं छिपी हुई है.’ उन्होंने कहा, यही वजह है कि नोटबंदी का फैसला लेना जरूरी था.

गोयल ने कहा कि जब 2014 में नई सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब देश भ्रष्टाचार और घोटालों में उलझा हुआ था. अब मोदी सरकार ने एक कदम उठाया है, जिसके माध्यम से वह लोगों की अपेक्षाओं पर खरे भी उतरे हैं. उन्होंने कहा, ‘लेकिन ऐसे लोग भी हैं जो इस कदम से खुश नहीं हैं. यह भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और राजनीतिक दलों को इस पर खुश होना चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अगर पांच फीसदी लोग भी कर नहीं देते तो उसका खामियाजा 95 फीसदी लोगों को भुगतना पड़ता है और वह इसकी कीमत चुकाते हैं. अगर कर दिया जाता है तो केंद्र सरकार के पास किसानों, महिलाओं, अनुसूचित जाति जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के लोगों और अन्य के कल्याण के लिए काम करने के वास्ते अधिक धन उपलब्ध होगा.’


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