अच्छे दिनों का वादा कर सत्ता में आई मोदी सरकार देश के युवाओं को रोजगार देने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है. मोदी सरकार 500 में से केवल 3 को बेरोजगारों को रोजगार दे पा रही है.

2015 में रोजगार केंद्रों द्वारा नौकरी दिलाने का औसत 0.57 प्रतिशत रहा यानी रोजगार केंद्र में नौकरी की तलाश में पंजीकरण कराने वाले हर 500 में से केवल तीन को रोजगार मिला. नेशनल करियर सर्विस के पोर्टल के अनुसार इस दौरान कुल 14.85 लाख लोगों ने नौकरी के लिए पंजीकरण कराया था.

रोजगार केंद्र द्वारा नौकरी दिलाने के मामले में गुजरात देश में अव्वल है लेकिन नौकरी खोजने वालों की संख्या सबसे ज्यादा तमिलनाडु में रही. साल 2015 के पहले नौ महीनों में रोजगार केंद्र में 80 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया. वहीं गुजरात में केवल 6.88 लाख लोगों ने नौकरी के लिए पंजीकरण कराया.

नौकरी के लिए पंजीकरण के मामले में तमिलनाडु के बाद पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र का स्थान रहा. 2015 में नौकरी के लिए पंजीकरण कराने वाले करीब 60 प्रतिशत उम्मीदवार (2.71 करोड़) इन पांच राज्यों के थे. इन पांच राज्यों में 27,600 लोगों को रोजगार केंद्र से नौकरी मिली। यानी इन राज्यों में 0.1 प्रतिशत लोगों को रोजगार मिल सका.


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