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तीन तलाक के विरोध में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट हलफनामा दाखिल कर चुकी हैं. जिसके बाद मुस्लिम संगठनों ने इस मसलें पर केंद्र सरकार के खिलाफ मौर्चा खोल दिया हैं.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र की मोदी सरकार पर यूनिफार्म सिविल कोड की आड़ लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ को खत्म करने की साजिश करने का आरोप लगाया. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर जफरयाब जिलानी ने कहा कि भारत का मुसलमान शरियत में बदलाव नहीं करेगा. उन्होंने सरकार को इस मसलें पर जनमत संग्रह करवाने की मांग की हैं.

इसी मुद्दे पर समर्थन को लेकर मुफ़्ती तौफीक मंसूर ने मज़हिरी ने ऑनलाइन याचिका दाखिल की हैं जिसमे कहा गया कि मुसिम पुरुष और महिला इस्लामिक शरिया कानून के दायरे में निकाह, वसीयत और तलाक से जुड़े मामलों में किये गए सभी फैसलों से संतुष्ट हैं और इसमें किसी भी सुधार की जरुरत महसूस नहीं करता.

याचिका  में आगे कहा गया कि हम पूरी तरह से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन करते हैं और मजबूती से शरिया कानून की रक्षा करने के लिए एक साथ खड़े हैं. अब तक इस याचिका को 14000 से अधिक लोगों का समर्थन मिल चूका हैं.

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