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नई दिल्ली | आज नोट बंदी हुए पुरे हुए एक साल हो गए. इन एक साल में भारत कितना बदला यह तो पूरा देश जानता है. लेकिन आज भी देश की जनता प्रधानमंत्री मोदी के उन दावों के पूरा होने का ख्वाब देख रहा है जो उन्होंने पिछले साल आज ही के दिन किये थे. मोदी ने 8 नवम्बर 2016 को रात 8 बजे कहा था की अब वो एतिहासिक समय आ गया है जब देश के विकास के लिए बड़े और निर्णायक फैसले लेने होंगे.

उन्होंने कहा था की देश में भ्रष्टाचार, कालाधन, आतंकवाद और जाली नोट, विकास के लिए नासूर बन गए है. इसलिए इन सबको खत्म करने के लिए सरकार ने नोट बंदी करने का फैसला किया है. मोदी ने देश को बताया की आज रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोट लीगल टेंडर नही रहेंगे , मतलब आज रात से वो एक कागज के टुकड़े के अलावा कुछ नही होंगे.

उस समय मोदी ने देश से 50 दिन मांगे और अपील की , की केवल 50 दिन मेरा साथ दे दीजिये , 50 दिन मैं आपको आपके सपनो का भारत दे दूंगा. मोदी सरकार ने लोगो पुराने नोट बदलने के लिए 50 दिन का समय दिया. लेकिन इन 50 दिनों में हर घंटे नियम बदले गए. नियम ही नही बाद में गोल पोस्ट भी बदले जाते रहे. दरअसल सरकार को उम्मीद थी की करीब 3-4 लाख करोड़ रूपए बैंकों में वापिस नही आयेंगे.

लेकिन जब दिसम्बर के मध्य में बैंकों में लगभग 95 फीसदी पैसा वापिस आ गया तो सरकार ने कैशलेस इकॉनमी का राग अलापना शुरू कर दिया. इस दौरान पूरा देश बैंकों की लाइन में लगा रहा और सरकार अपना मकसद बदलती रही. सैकड़ो लोगो की जाना एटीएम की लाइन में लगने की वजह से हो गयी. लाखो लोग बेरोजगार हो गए और देश की अर्थव्यवस्था धरातल में चली गयी. लेकिन सरकार इसे मास्टर स्ट्रोक बताती रही.

चलिए अगर मोदी के 8 नवम्बर के भाषण की ही बात करे तो पता चलेगा की नोट बंदी से वह कोई भी दावा पूरा नही हुआ जो उन्होंने किया था. भ्रष्टाचार अगर 1000 के नोट से ज्यादा था तो 2000 के नोट से वह कम हो जाए इसका सवाल ही पैदा नही होता. रही बात जाली नोट की तो , रोजाना देश में नए 2000 और 500 के नकली नोट पकडे जा रहे है. वैसे भी मोदी सरकार ने लोकसभा में जो आंकड़े दिए थे उसके अनुसार देश में केवल .0002 फीसदी जाली नोट है.

अगर आतंकवाद की बात करे तो जम्मू कश्मीर में पिछले एक साल में जबर्दस्त तरीके से आतंकी घटनाओ में तेजी आई है. वही नक्सली हमलो में मरने वाले हमारे जवानों की संख्या में 82 फीसदी की वृद्धि हुई है. तो ये दावे भी हवाई निकले. कालेधन की बात करे तो अगर पूरा पैसा बैंकिंग सिस्टम में लौट आया तो कालाधन कहाँ पकड़ा गया? इन सब बातो से यही लगता है की यह कदम केवल बैंकों को बचाने के लिए और उधोगपतियो का कर्जा माफ़ करने के लिए लिया गया था.

जो सरकार ने साबित भी कर दिया. हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की थी सरकार बैंकों के लिए 2.10 लाख करोड़ रूपए जारी करेगी. सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया क्योकि बैंकों को एनपीए बढ़कर 9 लाख करोड़ तक पहुँच गया था. समझा जा सकता है की सरकार के इस कदम से बैंकों को करीब 2.10 करोड़ रूपए मिलेगा जो एनपीए में चला गया था. हालाँकि सरकार इसे उपलब्धि बता रही है लेकिन मैं इसे देश के लिए नही बल्कि बैंकों और उधोगपतियो के लिए उठाया गया कदम ही मानूंगा. बाकी जनता जनार्धन…

प्रशांत चौधरी

नोट: उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है.


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