हैदराबाद : हैदराबाद यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से निलंबन के बाद खुदकुशी करने वाले छात्र रोहित वेमुला को तत्कालीन आंध्र प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग द्वारा जारी सर्टिफिकेट में दलित बताया गया है। रोहित के खुदकुशी करने की वजह से राज्य से हैदराबाद से लेकर दिल्ली तक राजनीति गर्म है और दावा किया जा रहा था कि रोहित दलित नहीं, बल्कि पिछड़े समुदाय का है। राजस्व विभाग द्वारा जारी सर्टिफिकेट में रोहित को माला समुदाय का बताया गया, जो अनुसूचित जाति के अंतर्गत आता है।

 

इस सर्टिफिकेट में रोहित का पूरा नाम वेमुला रोहित चक्रवर्ती लिखा है। इस पर गुंटूर मंडल के तहसीलदार के. शिवनारायण मूर्ति के डिजिटल सिग्नेचर भी हैं। 26 साल के रिसर्च स्कॉलर रोहित को चार अन्य छात्रों के साथ यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद रोहित ने खुदकुशी कर ली।

कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बाद हैदराबाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में ‘देश-विरोधी गतिविधियों’ की शिकायत की थी, जिसके बाद मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को छह लेटर भेजे। कहा जा रहा है कि विश्वविद्यालय ने दबाव में निर्णय लिए, जिससे रोहित ने खुदकुशी कर ली। रोहित को दलित बताने वाले सर्टिफिकेट में उसकी जन्मतिथि 30 जनवरी, 1989 लिखी है।

माला समुदाय को संविधान के मुताबिक अनुसूचित जाति में गिना जाता है। रोहित दलित है या नहीं, इस बात पर विवाद तब शुरू हुआ जब जांचकर्ताओं ने पाया कि रोहित के पिता वडेरा समुदाय से थे, जिसे पिछड़े समुदाय में गिना जाता है, न कि अनुसूचित जाति में। बुधवार को सोशल मीडिया पर रोहित की दादी की एक क्लिप भी खूब चली, जिसमें वह दावा कर रही हैं कि उनका बेटा ‘रोहित के पिता’ अनुसूचित जाति के नहीं थे। हालांकि, रोहित की मां अनुससूचित जाति से ताल्लुक रखती हैं।

बुधवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्पष्ट किया कि यह दलित बनाम दलित-विरोधी का मुद्दा नहीं है और उन्हें पुलिस और कोर्ट से न्याय का पूरा भरोसा है। साभार: नवभारत टाइम्स


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