man cary body his wife

भुवनेश्वरः एक बेहद शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है जहाँ आदिवासी शख्स अपनी पत्नी की लाश को 12 किलोमीटर तक कंधो पर ढोकर चला क्यों की उसके पास एम्बुलेंस को देने के पैसे नही थे. अस्पताल ने बिना पैसो के किसी भी तरह की मदद देने से साफ़ मना कर दिया था. साथ में शख्स की बेटी भी थी जो पिता के साथ सामान उठाये पैदल पैदल चल रही थी एक तरफ माँ के गम में उसके आंसू नही रुक रहे थे.

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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, दाना माझी बुधवार को अपनी पत्नी के शव को भवानीपुरा टाउन के अस्पताल से चादर में लपेटकर 60 किलोमीटर दूर कालाहांडी के मेलघर स्थित अपने गांव के लिए निकल पड़ा। उसके साथ उसकी बेटी भी थी। माझी की पत्नी टीबी की मरीज थी, जिसका बुधवार सुबह देहांत हो गया।

माझी ने कहा, मैंने सबसे अनुरोध किया पर किसी ने मेरी बात सुनी। मेरे पास और क्या रास्ता बचा था सिवाय इसके कि मैं उसे अपने कंधे पर लादकर ले जाऊं। वह लगभग 12 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका था तब कुछ युवाओं ने उसे देखा और स्थानीय प्रशासन को इस बात की जानकारी दी। जल्द ही शव को मेलघर गांव तक ले जाने के लिए ऐम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।

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वहीं, कालाहांडी जिले के कलेक्टर ब्रुंद्धा डी ने दावा किया कि माझी ने गाड़ी का इंतजाम कराने का इंतजार नहीं किया। हम शव को वाहन में भेज सकते थे। यह पहली बार नहीं है जब लोगों को इस तरह बॉडी ट्रांसपोर्ट करनी पड़ी है। मई में दो लड़कों को अपने रिश्तेदार की बॉडी को झारिगन कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर से अपने गांव तक ले जाना पड़ा क्योंकि किसी वाहन का इंतजाम करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे।

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