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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नोटबंदी के खिलाफ हाई कोर्ट्स और दूसरी निचली अदालतों में नोटबंदी के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई हैं.

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने नोटबंदी के बाद देश में पैदा हुए हालात पर चिंता जाहिर करते हुए स्थिति को गंभीर बताया हैं. उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि नोटबंदी से लोगों को दिक्कतें हो रही हैं, और इस सच्चाई से केंद्र सरकार इंकार नहीं कर सकती. उन्होंने आगे कहा, स्थिति गंभीर हो रही है, और ऐसे हालात में गलियों में दंगे भी हो सकते हैं.

चीफ जस्टिस ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा, “आपने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद किया है, लेकिन 100 रुपये के नोट का क्या हुआ…?” इस बारे में सरकार ने कहा कि मौजूदा समय में एटीएम मशीनों में सिर्फ 100 रुपये के नोटों के लिए एक ही ड्रॉअर लगा हुआ है, इसलिए नए नोटों के लिहाज़ से उन्हें री-कैलिब्रेट करना होगा.

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा, “पिछली बार आपने कहा था कि आप जनता को राहत देने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन आपने तो रकम को घटाकर 2,000 रुपये कर दिया… समस्या क्या है…? क्या यह प्रिंटिंग (नोटों की छपाई) से जुड़ी दिक्कत है…?”

सरकार की ओर से शीर्ष वकील ने जवाब में कहा कि, “सिर्फ प्रिंटिंग नहीं… नोटों को देशभर में फैली (बैंकों की) लाखों शाखाओं तक पहुंचाना भी है, और एटीएम को भी री-कैलिब्रेट किया जाना है… वैसे, हमने किसानों, शादियों तथा छोटे व्यापारियों को राहत दी है…

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘लोग वास्तविक समस्याओं का सामना कर रहे हैं और हम उन्हें अदालत जाने से नहीं रोक सकते. इसके लिए देशभर की अलग-अलग अदालतों में दायर याचिकाओं को किसी एक हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए याचिका दाखिल करे.


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