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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हजार और पांच सौ के नोट बंद किये जाने के बाद देश में मची अफरा तरफी को लेकर राजधानी दिल्ली में देश की जनता ने केंद्र सरकार के खिलाफ मौर्चा खोल दिया हैं.

विभिन्न नागरिक संगठनों ने एक जुट होकर सोमवार को जंतर मंतर पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया जिसमे बुद्धिजीवी वर्ग से लेकर आम आदमी तक ने हिस्सा लिया. इस विरोध में कवियों, लेखकों, छात्र संगठनों, नागरिक संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने हिस्सा लेकर केंद्र के इस फैसले को जन विरोधी बताते हुए कहा कि इस फैसले से काला धन रखने वाले व्यक्तियों पर कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ा है बल्कि सिर्फ गरीब, कामगार आम जनता को ही इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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फोरम अगेंस्ट करप्शन एंड थ्रेट्स के अध्यक्ष इंदु प्रकाश सिंह ने कहा, “इस फैसले से काले धन पर लगाम नहीं लग पायेगी. इससे सिर्फ आम जनता का ही उत्पीडन होगा. बल्कि यह फैसला काला धन रखने वालों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है क्योंकि अब नोटों की ही काला बाजारी शुरू हो गयी है. उन्होंने आगे कहा, “अगर सरकार ने इस फैसले को योजनाबद्ध तरीके से किया होता तो आम जनता को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता. तब इस फैसले को जनता ख़ुशी से स्वीकार करती.”

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वहीँ  शहरी महिला कामगार यूनियन की अध्यक्ष अनीता कपूर ने कहा, “इस फैसले से सबसे ज्यादा पीड़ित दिहाड़ी मजदूर और गरीब लोग हैं. उनकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी थम गयी है. गृहणियों की हालत यह हो गयी है कि वो फिलहाल घर का सामान भी नहीं खरीद पा सही हैं. जिन लोगों ने अपने नोट बदल लिए हैं उन्हें भी कोई राहत नहीं है. क्योंकि उन्हें बैंक से दो हज़ार के नोट मिले हैं. इस दो हज़ार के नोट को कोई दूकानदार नहीं ले रहा है क्योंकि इसके छुट्टे मिलना मुश्किल हो रहा है.”

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