नोटबंदी के चलते वर्ल्ड बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अपने अनुमान को घटा दिया है. बैंक की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े मूल्य के नोटों को तत्काल चलन से हटाने से ‘वर्ष 2016 में अर्थिक वृद्धि धीमी पड़ी है.’

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत की वृद्धि दर मार्च 2017 को समाप्त होने जा रहे वित्त वर्ष में अब भी 7 प्रतिशत तक रहेगी. हालांकि वर्ल्ड बैंक का पहले का अनुमान 7.6% था. विश्व बैंक ने कहा कि सरकार की ओर से नवंबर में बड़ी मात्रा में करंसी वापस लेने और नई करंसी जारी करने की वजह से 2016 के आखिरी महीनों में विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है.

रिपोर्ट में कहा गया  कि तेल की कीमतों में कमी और कृषि उत्पाद में ठोस वृद्धि से नोटबंदी की चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाएगा. वर्ल्ड बैंक ने यह भी कहा है कि आने वाले सालों में देश की वृद्धि अपनी तेज लय पकड़ लेगी और 7.6 और 7.8 प्रतिशत के स्तर को फिर प्राप्त कर लेगी.

रिपोर्ट में बताया गया कि नोटबंदी का ‘मध्यावधि में एक फायदा यह है कि बैंकों के पास नकद धन बढने से ब्याज दर में कमी करने और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में मदद मिलेगी.’लेकिन देश में अब तक 80 प्रतिशत से ज्यादा कारोबार नकदी में होता रहा है, इसे देखते हुए नोटबंदी के चलते ‘अल्प काल ’ में कारोबारियों और व्यक्तियों की आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान बना रह सकता है.


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