कुपवाड़ा: उत्तरी कश्मीर के नतनुसा गांव में एक डरावना सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां शुक्रवार को सेना की फायरिंग में 17-साल के आरिफ अहमद की मौत के बाद लगाए गए कर्फ्यू में सैकड़ों पुलिसकर्मी और केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान चौकसी बरत रहे हैं।

कुपवाड़ा: जिस जगह सुरक्षाबलों की फायरिंग में लड़के की मौत हुई वहां एक भी पत्थर नहीं दिखाऊपर पहाड़ियों पर कुपवाड़ा-श्रीनगर हाइवे पर स्थित आर्मी कैंप में मौजूद सैनिक हर मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षाबलों को उस वक्त फायरिंग के लिए मजबूर होना पड़ा, जब एक उग्र भीड़ ने कैंप में घुसने की कोशिश की थी। लेकिन घटना के बाद यहां का दौरा करने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इतनी ऊंचाई पर स्थित बैरकों में पत्थर कैसे पहुंच सकते हैं। यहां पत्थरबाजी के कोई निशान नहीं हैं। शुक्रवार को जहां भीड़ जमा हुई थी, वहां कोई ईंट या चट्टान आसपास नजर नहीं आ रहा है।

‘बिना उकसावे के की गई फायरिंग’
एक स्थानीय नागरिक गुलाम मोहिउद्दीन ने कहा, यह बिना उकसावे के की गई फायरिंग थी। लोग सड़क पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। अगर हम कैंप पर पत्थरबाजी में शामिल थे तो फिर पत्थर या ईंटें कहां हैं? वो दिखाएं कि क्या पत्थरबाजी में किसी भी जवान को चोट लगी?

नतनूसा गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर अवूरा गांव में आरिफ के पिता मोहिउद्दीन डार, जो मजदूरी करते हैं, वो सबसे पूछ रहे हैं कि उनके बेटे को क्यों मार दिया गया। वो कहते हैं, क्या वह जिहादी था? क्या उसने पत्थरबाजी की थी? क्या वे मुझे बता सकते हैं कि उसे क्यों मारा गया? मुझे लगता है कि मैंने कोई गुनाह किया, जिसकी सजा ऊपरवाले ने मुझे दी है।

11वीं कक्षा के छात्र की मौत और तीन अन्य के घायल होने के बाद से कुपवाड़ा जिले में कई प्रदर्शन हुए हैं। घाटी के विभिन्न हिस्सों में चार अन्य लोगों की मौत हो गई।

क्या है लड़की के बयान की हकीकत?
प्रदर्शन की शुरुआत उस वक्त हुई जब ऐसे आरोप सामने आए कि मंगलवार को सेना के एक जवान ने कथित रूप से एक स्कूली छात्रा से छेड़छाड़ की। हालांकि सेना ने बाद में एक मोबाइल वीडियो जारी किया, जिसमें लड़की को यह कहते हुए दिखाया गया कि उसके साथ एक लड़के ने बदसलूकी की, न कि जवान ने। लेकिन शनिवार को उसकी मां ने एनडीटीवी से कहा कि बयान देने के लिए लड़की पर दबाव डाला गया था।

सत्ताधारी पीडीपी ने इन हत्याओं को अनुचित बताया है और सेना तथा पुलिस द्वारा बलप्रयोग किए जाने की निंदा की है। घाटी में अफवाह फैलने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा पर भी रोक लगा दी गई। (khabar.ndtv.com)


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