नई दिल्ली | पिछले साल 8 नवम्बर को प्रधानमंत्री मोदी ने देश में 500 और 1000 के नोटों को चलन से बाहर करने का एलान कर देश में खलबली मचा दी. उस समय नोट बंदी के इस फैसले को सरकार ने कालेधन और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए उठाया गया कदम बताया था. हालाँकि नोट बंदी के 8 महीने बाद भी इन दोनों ही क्षेत्रो में सरकार को कोई खास सफलता नही मिली है. उधर विपक्षी दल भी लगातार नोट बंदी के फैसले पर सवाल उठाते आये है.

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अब मोदी सरकार के इस फैसले की आलोचना करने वालो में एक और शख्स का नाम शामिल हो गया है. नोबल पुरस्कार से सम्मानित अन्तराष्ट्रीय अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने नोट बंदी के फैसले को गलत बताते हुए कहा है की इस कदम से कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम नही लगाया जा सकता. यही नही क्रुगमैन ने मोदी सरकार के इस फैसले पर हैरानी भी जताई. उन्होंने कहा की नोट बंदी से भारत की अर्थव्यवस्था को काफी नुक्सान पहुंचा है.

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हालाँकि उन्होंने माना की यह उतना नुक्सान नही है जितना उनको उम्मीद थी. लेकिन फिर भी मोदी सरकार के इस कदम और रिज़र्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीतियों की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को नुक्सान हुआ है. इसलिए जिस किसी ने भी सरकार को नोट बंदी की सलाह दी वो गलत सलाह थी.  क्रुगमैन का यह भी दावा है की मोदी सरकार की आर्थिक नीतिया उम्मीदों पर खरी नही उतरी है.

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इसके अलावा क्रुगमैन ने छह फीसदी की विकास दर को भी भारत के लिए नाकाफी बताया. उन्होंने कहा की भारत जैसे देश में जहाँ दुनिया की सबसे बड़ी कामकाजी जनसँख्या रहती है , वहां 6 फीसदी विकास दर काफी नही है. उन्होंने 8 से 9 फीसदी की विकास दर को देश के लिए सही बताया. इसके अलावा क्रुगमैन ने मोदी सरकार और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से ब्याज दरो मे कटौती करने की भी सलाह दी.


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