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भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले की आलोचना करते हुए इसे मोदी सरकार की निरंकुशता से जुड़ा फैसला बताया हैं.

डियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अमर्त्य सेन ने कहा, ‘लोगों को अचानक बताया गया कि उनकी करेंसी अब काम की नहीं है, उसका इस्तेमाल वो अब नहीं कर सकते हैं. यह अधिनायकवाद जैसा है। सरकार इसे कथित तौर पर जायज ठहरा रही है.

नोटबंदी से लोगों को हो रही मुश्किलों पर उन्होंने कहा, “केवल एक अधिनायकवादी सरकार ही चुपचाप लोगों को इस संकट में झेलने के लिए छोड़ सकती है. आज लाखों निर्दोष लोगों को अपने पैसे से वंचित किया जा रहा है और अपने स्वयं के पैसे वापस लाने की कोशिश में उन्हें पीड़ा, असुविधा और अपमान सहना पड़ रहा है.

विदेशों में जमा काले धन को वापस भारत लाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ‘सरकार ने विदेशों में पड़े काला धन भारत वापस लाने और सभी भारतीयों को देने का वादा किया था और फिर सरकार उस वादे को पूरा करने में असफल रही’

सेन ने कहा, जो लोग काला धन रखते हैं उन पर इसका कोई खास असर पड़ने वाला नहीं है लेकिन आम निर्दोष लोगों को नाहक परेशानी उठानी पड़ रही है


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