नई दिल्ली | शुक्रवार रात को संसद के सेंट्रल हॉल में एक भव्य समारोह आयोजित कर मोदी सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया. आजाद भारत के सबसे बड़े कर सुधार के तौर पर देखे जा रहे जीएसटी के लागू होने के बाद देश के सभी व्यापारी असमंजस की स्थिति में है. दरअसल जैसे ही शनिवार को ज्यादातर कारोबारियों ने बिज़नस शुरू किया तो उनको लगा की सरकार ने सभी तैयारिया पूरी करने के बाद जीएसटी लागु किया होगा लेकिन ऐसा नजर नही आया.

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अभी तक भी सरकार ने सिस्टम को जीएसटी के मुताबिक अपडेट नही किया है. कई कारोबारियों के सिस्टम अभी भी वैट प्रणाली पर ही चल रहे है. कुछ ऐसे कारोबारी जिनके यहाँ पुराना माल पड़ा हुआ है वो भी असमंजस की स्थिति में है. वो पुराने माल को किस कर ढांचे के अनुरूप बेचे. न्यूज़ चैनल आजतक ने जब दिल्ली, लखनऊ, नोयडा, पटना, मुंबई और कुछ अन्य जगहों के व्यापारियों से बात की तो सभी जगह उन्हें ऐसी ही समस्याए देखने को मिली.

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वही राजस्थान के मार्बल व्यापारियों ने मूर्तियों पर जीएसटी लगाने के सरकार के फैसले का विरोध किया. उनका कहना है की इससे उनके कारोबार पर असर पड़ेगा. उधर पुजारियों ने भी सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताई. मालूम हो की अभी तक मूर्तियों पर कोई भी टैक्स नही लगता था. उधर दिल्ली और मुंबई में जीएसटी को लेकर मिली जुली प्रतिक्रियाये सामने आ रही है.

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जहाँ दिल्ली में ट्रेक्टर पार्ट्स बनाने वाले व्यापारियों का कहना है की ट्रेक्टर पार्ट्स पर 18 फीसदी टैक्स लगाने से ट्रेक्टर की कीमतो में वृद्धि हो जाएगी जिसका सबसे ज्यादा असर किसानो पर पड़ेगा. पहले ट्रेक्टर पार्ट्स पर 5 फीसदी टैक्स लगता था. उधर जीएसटी के विरोध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओ ने आज इलाहबाद में गंगा गोमती ट्रेन को रोककर प्रदर्शन किया. हालाँकि समाजवादी पार्टी ने जीएसटी को अपना समर्थन दिया था.


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