देश की सर्व्वोच अदालत द्वारा एक साथ तीन तलाक देने की प्रथा को अवैध ठहराए जाने के बाद अंदेशा जताया जा रहा था कि केंद्र की सरकार इस सबंध में कानून लाएगी. लेकिन केंद्र ने स्पष्ट कर दिया कि ट्रिपल तलाक पर कानून का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.

विधि एवं न्याय मंत्रालय की और से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार संतुष्ट है और ऐसी स्थिति में अलग से कोई काननू बनाने की जरूरत नहीं है.

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केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक को असंवैधानिक मानते हुए इसे अमान्य घोषित कर दिया है. ऐसी स्थिति में हमें अलग से कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है. इस संबंध में सरकार के पास फिलहाल कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.’’

ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर केंद्र सरकार को कानून बनाने का आदेश देते हुए 6 महीने के लिए रोक लगा दी है. न तलाक पर छ महीने के लिए रोक लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि नया क़ानून संसद बनाएगी. यह काम कोर्ट नहीं करेगा.

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कोर्ट ने ये फैसला उतराखंड की शायरा बानो नामक महिला की याचिका पर दिया है. जिसमे उसने तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी.


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