नई दिल्ली  जानीमानी अर्थशास्त्री और जेएनयू की प्रफेसर जयति घोष ने 9 फरवरी की घटना को यूनिवर्सिटी के खिलाफ केंद्र की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा, ‘इसकी योजना बड़े स्तर पर की गई थी। हमें शक है कि चेहरे पर नकाब पहने जिन तीन लोगों ने राष्ट्र-विरोधी नारे लगाए वे आईबी से थे।’

जयति ने जेएनयू में राष्ट्रवाद के मुद्दे पर शनिवार को हुई चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाए कि यह जानबूझकर यूनिवर्सिटी को निशाना बना रही है,क्योंकि यह छात्रों से डरी हुई है जो सोच और विचार सकते हैं। जयति ने कहा, ‘हम जितना सोचते हैं हम उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। हमें निशाना बनाया जा रहा है। इसलिए हमें अपना बचाव करना पड़ रहा है।’

जयति घोष अर्थशास्त्र की प्रफेसर ने राष्ट्र-विरोध के मुद्दे पर विस्तार से बात की और कहा कि यह सरकारी नीतियां हैं जो राष्ट्र-विरोधी हैं न कि जनता। उन्होंने कहा, ‘एक व्यक्ति कभी भी राष्ट्र-विरोधी नहीं हो सकता, यह नीतियां, सरकार की नीतियां हैं जो राष्ट्र-विरोधी हो सकती हैं।’ जयति ने कहा कि पिछले 30 सालों से सरकार की आर्थिक नीतियां जनता-विरोधी हैं और अब हाल ही में ईपीएफ पर 60 प्रतिशत टैक्स का फैसला बेहद क्रूर है। इससे लोगों को अस्थिर बाजार में निवेश करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र-विरोधी शब्द पर चर्चा नया नहीं है बल्कि कुछ साल पहले से चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ सालों से सरकार के राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई के लिए राष्ट्र-विरोधी शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ न्याय राष्ट्र-विरोधी था, जो विस्थापित लोगों के लिए सोच रहे हैं, उन्हें राष्ट्र-विरोधी बताया गया, जो बॉक्साइट खनन के खिलाफ बात कर रहे हैं उन्हें राष्ट्र-विरोधी बताया जा रहा है। और अब हम देख रहे हैं कि पूरे यूनिवर्सिटी को राष्ट्र-विरोधी बताया जा रहा है।’

जयति ने कहा कि संविधान के तहत राष्ट्र को जिस तरह परिभाषित किया गया है उसका मतलब सिर्फ संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक भारतीय गणराज्य नहीं, है, बल्कि संविधान सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था और राजनीति की भी बात करता है। उन्होंने कहा, ‘दूसरा अभिव्यक्ति, विचार और धार्मिक विचार की आजादी और कई अन्य बातें भी इसमें शामिल हैं। तीसरा, दर्जे और अवसर की समानता। चौथा भाईचारा भी राष्ट्र की परिभाषा में शामिल है।’ (NBT)


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