नई दिल्ली | निजी जीवन में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव की वजह से हम सच्चाई से कोसो दूर होते जा रहे है. फेसबुक, ट्वीटर से लेकर व्हाट्सएप तक , रोजाना ऐसी खबरे इधर से उधर की जाती है जिनको पढ़कर समाज का एक बड़ा धडा प्रभावित हो जाता है. जिसकी वजह से समाज में दंगे और हिंसा बढ़ रही है. अभी हाल ही में झारखण्ड में व्हाट्सएप पर फैली बच्चा चोरी की अफवाह के बाद भीड़ ने चार लोगो को पीट पीटकर मार डाला. जबकि यह कोरी अफवाह के अलावा कुछ भी नही थी.

एक ऐसी ही खबर पिछले काफी दिनों से फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर की जा रही है. जिसमे बताया गया है की ‘रूहअफ्जा’ बनाने वाली कंपनी हमदर्द में केवल मुस्लिमो को नौकरी पर रखा जाता है. इससे पहले यह भी बताया जाता है की अहमदाबाद की किसी कंपनी ने एक मुस्लिम को नौकरी पर नही रखने पर काफी हंगामा मचाया गया लेकिन हमदर्द के मामले में सब चुप है जहाँ किसी हिन्दू को नौकरी पर नही रखा जाता.

जब इस खबर की पड़ताल की तो सच्चाई सामने आ गयी. दरअसल इस पुरे मामले पर न्यूज़ चैनल आज तक ने अपनी एक टीम  दिल्ली में आसफ अली अली रोड स्थित हमदर्द के हेड ऑफिस भेजी. जब यह टीम यहाँ पहुंची तो उन्हें रिसेप्शन पर एक लड़की मिली जिसका नाम भूमिका उप्पल था. ऑफिस में घुसते ही खबर की परते खुलने शुरू हो गयी. इसके बाद भूमिका ने उन लोगो को चीफ सेल्स एंड मार्केटिंग अफसर मंसूर अली के पास भेज दिया.

मंसूर का ऑफिस तीसरे माले पर मौजूद था. जब उनसे हिन्दुओ को नौकरी नही देने की खबर के बारे में पुछा गया तो उन्होंने इसे झूठ करार दिया. इसके बाद मंसूर ने टीम की मुलाकात कंपनी के चीफ फाइनेंस ऑफिसर उमेश कैंथ से करायी. दोनों अफसरों से बात करने के बाद और भी कई एम्प्लाइज से बात की गयी. जिससे पता चला की यहाँ मुस्लिम हिन्दुओ का अनुपात 50-50 है. यही नही कुछ अहम् विभागों की कमान भी हिन्दुओ के हाथ में है. सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही ये खबर केवल अफवाह मात्र है जो धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने की एक कोशिश हो सकती है.


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