आतंक के आरोप में गिरफ्तार कर मुस्लिम युवकों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर जबरन झूठे मामलों में फसाया जा रहा हैं. सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किये गए कानपुर के मोहम्मद आतिफ ने खुलास किया कि उनसे सादे कागज पर सिग्नेचर करवा गए.

आतिफ ने एनआईए व एटीएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कानपुर के रेल बाजार थाने में मनीष सोनकर ने सैफुल्लाह और उसके साथियों से मिले होने की बात कुबूल न करने पर उसे मारने की धमकी दी गई, साथ ही उसके परिवार को आतंक के फर्जी आरोप में फंसाने की भी धमकी दी गई.

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आतिफ का कहना हैं कि 7 मार्च के बाद से एटीएस और एनआईए के लोग उसे कभी कानपुर तो कभी लखनऊ कार्यालय बुलाते हैं. इस दौरान उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता. यहां तक कि अधिकारियों की बात न मानने पर उसकी बीवी और उसके पेट में पल रहे बच्चे तक को मारने की धमकी दी गई.

उसने आगे कहा कि एनआईए अधिकारियों ने 18 मार्च को ही फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड ले लिया था. आतिफ के भाई मोहम्मद आकिब का आरोप है कि 24 अप्रैल को महफूज नाम के व्यक्ति ने रास्ते में रोककर सिम के साथ मोबाइल मांगा. न देने पर एटीएस की हिट लिस्ट में मेरा नाम सबसे ऊपर बताया.

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रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि जांच एजेंसियां झूठे सुबूत जुटा रही हैं. हिरासत में लिए गए व्यक्ति का अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलना अधिकार है लेकिन ये अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है. वहीं रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने डी रेडिक्लाइजेशन को एक खास समुदाय के खिलाफ हेट कैंपेन का हिस्सा बताया.

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