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हैदराबाद | उड़ीसा के दाना मांझी याद है आपको? वही दाना मांझी जो अपनी बीवी की लाश को कंधे पर उठाकर 10 किलोमीटर पैदल चला था. यह तस्वीर मीडिया में आते ही पूरे देश में हंगामा मच गया. हालांकि बाद में बहुत से लोगो ने दाना मांझी की मदद की. अब एक और मामला सामने आया है जिसमे पति को अपनी पत्नी की लाश उठाकर 80 किलोमीटर तक चलना पड़ा.

हैदराबाद के रामुलु एकेड लेप्रोसी से ग्रसित है. वो हैदराबाद के मंदिरों में भीख मांगकर अपना और अपनी पत्नी का गुजरा करता था. उनकी पत्नी स्वयं भी लेप्रोसी से पीड़ित थी. इस शुक्रवार को उनकी पत्नी ने एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. 53 वर्षीय रामुलु ने अस्पताल से पत्नी की लाश को अपने पैत्रक गाँव माइकोड ले जाने के लिए एम्बुलेंस की मांग की. लेकिन अस्पताल ने इसके बाद रामुलु से 5 हजार रूपए मांगे.

रामुलु के पास पैसे नही थे इसलिए उसने अपनी पत्नी की लाश को एक गत्ते के बिस्तर पर लिटा पैदल चलना शुरू कर दिया. रामुलु पुरे दिन और रात अपनी पत्नी की लाश को गत्ते के बिस्तर पर घिसटते हुए चलता रहा. लेकिन करीब 80 किलोमीटर चलने के बाद रामुलु की हिम्मत जवाब दे गयी. विकाराबाद नामक इस जगह पर रामुलु ने अपनी पत्नी की लाश को छोड़ दिया.

विकाराबाद में रामुलु की पत्नी की लाश किनारे पड़ी थी और वो लाश के पास बैठे हुए रो रहा था. इस दौरान उसने कई लोगो से मदद भी मांगी लेकिन किसी ने उसकी मदद नही की. इसी बीच रोते रामुलु के ऊपर गाँव के कुछ लोगो की नजर पड़ी. लोगो ने स्थानीय विधायक और पुलिस की मदद से रामुलु की पत्नी की लाश को उसके गाँव तक पहुँचाया. इस तरह की घटनाये बार बार होने की वजह से हमारे सरकारी अस्पतालों की संवेदनाओ पर सवाल खड़े होना लाजिमी है.


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