Muslim woman

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने जयपुर में मुस्लिम महिला डॉक्टर को दिए जुबानी तलाक को अवैध मानते हुए महिला से तलाक के बाद इद्दत नहीं करने के निर्देश दिए हैं.

डॉक्टर की शादी 2002 में हुई थी, लेकिन पांच माह पहले ही उसे एक कागज भेजकर तलाक की जानकारी दी गई. कागज में जानकारी दी गई है कि पति ने गवाहों के सामने मौखिक तलाक दे दी थी. रेहाना (परिवर्तित नाम) के दो बच्चे हैं और वह जयपुर में रहकर इन बच्चों की अब अकेले ही शिक्षा दिला रही है.

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साल 2002 में टोंक में रुखसाना का निकाह उस्मान खान से हुआ था. जिसके बाद इनके दो बच्चे भी हुए. पति से अनबन शादी के दुसरे साल से ही शुरू हो गयी. पति की ज्यादतियों से परेशान होकर उसने उस पर दहेज प्रताडऩा और धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज कराया.

अचानक उसे पति की ओर से पत्र मिला, जिसमें उसे तलाक देने की जानकारी दी गई. पति ने इसी के साथ ही किसी और के साथ निकाह करने की भी उसे सूचना दे दी. इस तीन तलाक को रुखसाना ने पहले अदालत और फ़िर ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड में शिकायत दर्ज करायी.

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रुखसाना के सरे दस्तावेज और हालत को नज़र में रखते हुवे बोर्ड की अध्यक्ष की ओर से उन्हें एक पत्र भेजा गया. जिसमे बोर्ड ने उसे दिए गए जुबानी तलाक को अवैध मानते हुए रुखसाना से तलाक के बाद की धार्मिक प्रक्रिया यानी की इद्दत नहीं करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही कहा कि बोर्ड ने महिला को लिखे पत्र में कहा कि इस्लाम के कानून का खिलवाड़ कर यह तलाक देने का प्रयास है.

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