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ट्रिपल तलाक को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस.वाई.कुरैशी ने गुरुवार को कहा कि  इस्लाम लोकतान्त्रिक मज़हब है और इसमें औरतों को बराबरी के जितने हक़ दिए गए हैं उतने किसी भी मजहब में नहीं हैं. इस्लाम ने 1400 साल पहले औरतों को संपत्ति का अधिकार दिया जो किसी मज़हब में नहीं दिया.

कुरैशी ने आगे कहा, इस्लाम में महिलाओं को सर्वोच्च दर्जा प्राप्त है और किसी भी अन्य धर्म में समानता की ऐसी अवधारणा देखने को नहीं मिलती. उन्होंने आगे कहा, इस्लाम ने औरतों को अपनी पहचान बनाए रखने का भी सम्मान किया है इसलिए जब अन्य महज़ब में शादी के बाद नाम बदलने की इजाजत है, इस्लाम में औरत शादी के बाद भी अपना नाम बरक़रार रख सकती है.

कुरेशी ने कहा कि उन्होंने कहा, लोग समझते हैं कि महिलाओं को दबाया गया है. सरकार को यह सोचना चाहिए कि समुदाय में कानून पवित्र है, क्योंकि अब उसे उदार व्याख्या के साथ देखा जाता है. उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी लोग सोचते हैं कि हम लोग अपनी औरतों को दबा कर रखते हैं तो हमें इस पर सोचना चाहिए.

कुरैशी ने कहा, हम सब (मुसलमान) को एकजुट होना चाहिए और अपने धार्मिक कानूनों में किसी को भी हस्तक्षेप का मौका न दीजिए उन्होंने स्वीकार किया कि पर्सनल क़ानून में सुधार होना चाहिए लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कोई सुधार ऊपर से थोपा नहीं जाना चाहिए.


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