रांची | गुरुवार को झारखण्ड के राजनगर के पास ग्रामीणों के गुस्से का शिकार हुए सात लोग मौत के आगोश मे समां गए. इन सातो लोगो के ऊपर अपने अपने परिवार की जिम्मेदारी थी. केवल एक अफवाह के आधार पर लोगो ने इन सभी को पीट पीट कर मार डाला. इनमे से ही एक शख्स का नाम था शेख नईम. 38 वर्षीय शेख के ऊपर 15 लोगो के परिवार की जिम्मेदारी थी.

नईम पुरे परिवार में अकेला कमाने वाला था. सबसे दुखद बात यह है की उसकी एक बेटी ब्लड कैंसर से पीड़ित है जिसको हर महीने खून चढ़ाना पड़ता है. जब से नईम के परिवार को उसकी मौत की खबर मिली है , उनका रो रोकर बुरा हाल है. नईम की पत्नी सलमा बेगम ने बताया को उसके पति बैलो का व्यवसाय करते थे. वो मंगलवार को अपने गाँव फूलपाल से सरायकेला गए थे.

वहां से नईम ने 25 बैल खरीदे और गुरुवार को सभी बैलो को लेकर अपने गाँव लौट रहे थे. लेकिन राजनगर के नजदीक एक बैल लापता हो गया. इसलिए नईम अपने दोस्तों के साथ इंडिका कार में बैठकर उसको ढूँढने निकल पड़ा. राजनगर के नजदीक ही भीड़ ने नईम की गाडी को रोका और बच्चा चोरी का आरोप लगाकर लाठी डंडो से पीटना शुरू कर दिया.

नईम ने भीड़ के सामने हाथ जोड़कर खुद को बचाने की लाख कोशिश की लेकिन किसी ने उसकी एक नही सुनी और उसको पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया. जैसे ही इस बात की खबर नईम के गाँव पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया. नईम की पत्नी, उसके बच्चे और माँ बाप का रो रोकर बुरा हाल है. नईम की माँ लकवाग्रस्त है, इसलिए वो चल फिर नही सकती. नईम के तीन बच्चे है जिनमे सबसे बड़ी 9 साल , उससे छोटी 6 साल और एक चार साल का बेटा है.

नईम की पत्नी ने मीडिया से बात करते हुए कहा की उनकी सबसे छोटी बेटी को ब्लड कैंसर है. उसको हर महीने ब्लड चढ़ाना पड़ता है. अब उनके परिवार को कौन पालन पोषण करेगा. नईम की पत्नी ने पुलिस पर गुस्सा जताते हुए कहा की अगर वो चाहते तो उसके पति की जान बच सकती थी. लेकिन अगर पुलिस हमारी सुरक्षा नही कर सकती तो फिर न्याय की उम्मीद करना ही बेमानी है.


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