नई दिल्ली: देश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों की प्रतिनिधि संस्था ‘ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत’ ने साल 2011 की जनणगना में ‘मुस्लिम समुदाय के शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के क्षेत्रों में पिछड़े होने’ के लिए अब तक की सरकारों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इस पिछड़ेपन को दूर करने की खातिर शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण की जरूरत है और अगर इस पिछड़ेपन को दूर नहीं किया गया तो यह तबका देश के ऊपर बड़ा बोझ बन जाएगा।

और पढ़े -   दलितों के धर्म परिवर्तन को लेकर हिन्दू युवा वाहिनी का हंगामा, केरल के व्यक्ति को बनाया बंधक

'मुस्लिमों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए शिक्षा में आरक्षण की जरूरत'मुशावरत के अध्यक्ष नवेद हामिद ने गुरुवार को नई दिल्ली में कहा, ‘साल 2011 की जनगणना के जो आंकड़े सामने आए हैं वो मुसलमानों के लिहाज से काफी चिंता में डालने वाले हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश का मुस्लिम समाज शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। अगर इस पिछड़ेपन को दूर नहीं किया गया तो यह तबका देश के ऊपर बोझ बन जाएगा। हमारा मानना है कि इस समाज को कम से कम शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण की जरूरत है।’

और पढ़े -   झारखंड हत्याकांड पर पत्रकार सागरिका घोष ने कहा - भारत सरकार जागो, भीड़ मुसलमानों को मार रही

उन्होंने कहा, ‘सच्चर कमेटी ने मुस्लिम समाज की सही स्थित सामने रखी थी। वह सरकार की समिति थी। उसकी सिफारिशों पर भी सही से अमल नहीं किया गया। मुस्लिम समाज के पिछड़ेपन के लिए अब तक की सरकारों की नीतियां सबसे अधिक जिम्मेदार रही हैं।’

हामिद ने कहा, ‘स्वास्थ्य के स्तर भी मुसलमानों की उपेक्षा हुई है। मुस्लिम बहुल इलाकों में अस्पताल और दवाखाने नहीं होते। इसका सीधा असर इस समाज के लोगों के स्वास्थ्य पर होता है। आंकड़ो में ये बात सामने आई है।’ साभार: NDTV

और पढ़े -   निकाह के वक्त तीन तलाक का इस्तेमाल न करने की दुल्हों को सलाह देंगे काजी: AIMPLB

Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE