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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने दिल्ली में पीस फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक समारोह में कहा कि मुसलमान अपने धार्मिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर सकते.

उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ शरीअत पर आधारित है और इसलिए इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तीन तलाक की समग्रता पर विचार करने की अपील की हैं.  रहमानी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट किसी भी मुद्दे पर हस्तक्षेप कर सकता है. लेकिन हमारा आग्रह है कि तीन तलाक के मुद्दे पर वह इसकी समग्रता (केवल महिला अधिकार के आधार पर नहीं) पर विचार करे.’

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उन्होंने आगे कहा, ‘मुसलमान अपने धार्मिक मामलों व कानूनों पर किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं.’ रहमानी ने कहा, ‘देश के अधिकांश लोग अमन पसंद हैं. लेकिन कुछ मुट्ठी भर लोग समुदायों के बीच दरार पैदा करना चाहते हैं और इसे बांटने के लिए नई योजना बना रहे हैं.’

रहमानी ने  कहा कि भारत में मुसलमान देश के सभी कानूनों का आदर व पालन करते हैं, लेकिन वह अपने व्यक्तिगत कानूनों में कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे.

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