आतंकवाद से लड़ने और राष्ट्रीय एकता पर रहेगा ज़ोर, प्रदेश भर के विभिन्न  संगठनों के 50 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे.

भारत में क़रीब पांच लाख छात्रों के संगठन मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (एमएसओ) ने हमेशा कट्टरवादी वहाबी विचारधारा का विरोध किया है। मुस्लिम युवाओं के बीच असुरक्षा के भाव को दूर कर उन्हें मुख्यधारा से जो़ड़ने एवं अन्तर सामाजिक संबंधों पर मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (एमएसओ) ने काफ़ी काम किया है। एमएसओ भारत में सुन्नी सूफ़ी बहुसंख्यक समुदाय के नौजवान एवं छात्रों की प्रतिनिधि संस्था है जो भारत में कट्टरवादी वहाबी विचारधारा के जवाब में शांतिप्रिय सूफ़ीवाद के प्रकाश में समाज को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

आप देख पा रहे होंगे कि बर्बर तालिबान, अल्काएदा और आईएसआईएस कितने निर्मम तरीक़े से जनसंहार में लिप्त हैं और उसे इस्लाम का नाम देकर अपने कुत्सित राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने, हथियारों के प्रयोग और खनिज की लूट में लगे हैं। ये संगठन युवाओ में धार्मिक कट्टरता और नफरत का बीज बो रहे हैं और उन्हें अलगाववाद और उग्रवाद की तरफ ले जारहे है, और इस समस्या से भारत का शांतिप्रिय युवा न ग्रसित हो, इसलिए एमएसओ ने तीन दिन का शिविर आयोजित करने का फैसला किया है, जिसमे हम प्रयास करेंगे कि इस समस्या को समझें और इसका प्रतिकार करें। एमएसओ समझता है कि भारत इस संकट की घड़ी में अपने सामाजिक ताने बाने और निस्वार्थ सामाजिक भाव के आधार पर नेत़ृत्व कर मानवता को बचा सकता है। इस संकट की घड़ी में सूफ़ी संस्थाओं ने साथ आने का निर्णय किया है इसीलिए जयपुर में इस शिखर सम्मेलन/शिविर में हिस्सा लेने के लिए विभिन्न सूफ़ी संस्थाओं के 50 से अधिक ज़िम्मेदार युवा प्रतिनिधियों ने संकट के प्रतिकार का निर्णय किया है।

मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (एमएसओ) के सचिव शुजात अली क़ादरी ने बताया कि दो   दिन चलने वाले शिविर में ट्रेनर की हैसियत से एमएसओ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और एमएसओ केन्द्रीय प्लानिंग बोर्ड के चेयरमैन सय्यद मुहम्मद क़ादरी (मुंबई), स्टार टीवी और इंडिया न्यूज़ के पूर्व सीईओ प्रशांत टंडन, एमएसओ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुफ़्ती ख़ालिद अयूब मिस्बाही, ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम दिल्ली के अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर शाहनवाज़ मालिक वारसी, एमएसओ  सलाहकार परिषद् के अखलाक़ अहमद उस्मानी,  ग्लोबल फाउंडेशन फॉर सिविलाइज़ेशन नयी दिल्ली के निदेशक के.जी. सुरेश, सुन्नी तबलीग़ी जमात के राजस्थान प्रमुख मौलाना हनीफ़ ख़ाँ रिज़वी, राजस्थान जयपुर शहर मुफ़्ती अब्दुल सत्तार रिज़वी, अणुव्रत संसथान और गाँधी पीस फाउंडेशन के पंचशील जैन, कंज़ुल ईमान पत्रिका दिल्ली के सम्पादक ज़फ़रुद्दीन बरकाती प्रमुख नाम हैं।

सम्मेलन में पहले दिन अन्तरराष्ट्रीय आतंकवाद एवं राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता पर चर्चा होगी। ख़तरनाक वहाबी आतंकवादी संगठन में क़रीब २० भारतीय लड़कों के जुड़ने पर चर्चा की जाएगी। वहाबी अतिवाद से बचने के लिए राजकीय एवं संस्थानिक क्षेत्र में कार्य करते हुए मुस्लिम युवाओं को रोज़गार से जो़ड़ने एवं भारतीय राष्ट्रीय मुस्लिम नीति में बदलाव की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। एमएसओ का मानना है कि दुनिया को सिर्फ़ वहाबी आतंकवादी संगठन आईएस, अलक़ायदा, तालिबान, बोको हराम, जमातुद दावा, लश्करे तैयबा एवं सहविचारी संगठनों से ही ख़तरा नहीं है बल्कि लोकतंत्र का फ़ायदा उठाकर सोफ़्ट पॉलिटिकल मूवमेंट यानी मुस्लिम ब्रदरहुड, को भी बड़ा ख़तरा माना जाए।

MSO का मानना है कि भारत में आज भी मुसलमानों की कुल आबादी का ८० प्रतिशत सूफ़ी एवं १५ प्रतिशत शिया विचारधारा का मानने वाला है और वक़्फ़ पर उसकी नैसर्गिक दावेदारी है लेकिन वक्फ़ बोर्डों का संचालन असामाजिक पाँच प्रतिशत वहाबी हाथों में जाने से वहाबी विचारधारा का संस्थानिकरण हुआ है।

हम तक पहुँचें

इंजिनियर शुजात अली क़ादरी

राष्ट्रीय महासचिव (एमएसओ) व संयोजक सम्मलेन 09950595768

Email- [email protected] www.msoofindia.net     ट्वीटर- @shujaatQuadri


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