देश के कई मदरसों का दौरा करने वाली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की एक टीम ने कहा है कि मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए मुस्लिम समाज को खुद आगे आना होगा और सरकार के साथ मिलकर पहल करनी होगी।

हाल के दिनों की आयोग की टीम ने दिल्ली और मुंबई के कुछ मदरसों का दौरा किया और वहां की शिक्षा के हालात का जायजा लिया।

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आयोग के सदस्य और इस टीम की अगुवाई कर रहे प्रियंक कानूनगो ने भाषा से कहा, हम जितने भी मदरसों में गए हैं, वहां एक चीज देखने को मिली कि मुख्यधारा की शिक्षा का अभाव है। इनमैं पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा की खासी जरूरत है। इसके लिए सिर्फ सरकार कुछ नहीं कर सकती। मुस्लिम समाज और मदरसे चलाने वाले लोगों को खुद आगे आना होगा। हम मुस्लिम समाज और सरकार के बीच सेतु का काम कर सकते हैं।

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उन्होंने कहा, मदरसों को लेकर सरकार अकेले कुछ नहीं कर सकती। मदरसे चलाने वाले लोगों और मुस्लिम समाज की भागीदारी के बिना कुछ नहीं हो सकता। इसलिए हम मदरसा चलाने वाले लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वे सरकार के साथ समन्वय स्थापित करें।

आयोग ने मदरसा शिक्षा को लेकर दिल्ली और मुंबई में सम्मेलनों का आयोजन भी किया है। कानूनगो ने कहा, हमारे सम्मेलनों में मुस्लिम समाज और मदरसों के बच्चे और शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए। हम आगे भी इस तरह के सम्मेलनों का आयोजन करना जारी रखेंगे।

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