नई दिल्ली। मुसलमानों की एक मशहूर संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद का दिल्ली में चल रहे सेमिनार में देश के मौजूदा सियासी और समाजिक हालातों पर चर्चा हो रही है। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का कहना है कि मोदी सरकार अपने सबका साथ सबका विकास के वादे से पीछे हट गई है। मुसलमानों, इसाईयों और दलितों के लिए देश में माहौल खराब होता जा रहा है। सरकार अपनी विकास की नीतियों में अल्पसंख्यकों को कोई जगह नहीं दे रही है।

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इस सेमिनार में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम समेत कई मशहूर हस्तियां मौजूद थीं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने समारोह के लिए एक चिट्ठी भेजी। ये चिट्ठी गुलाम नबी आजाद ने पढ़कर सुनाई।

चिट्ठी में लिखा था ‘मुल्क नाजुक दौर से गुजर रहा है। नफरत का माहौल बना हुआ है। सेकुलरिज्म को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में हमें एक मंच पर आना होगा। उम्मीद करती हूं कि जमीयत की कोशिश रंग लाएगी। वहीं विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं के इस सेमिनार में आने की उम्मीद है। यूपी में होने वाले चुनाव के मद्देनजर इस सेमिनार का एक राजनीतिक महत्व माना जा रहा है।’ (ibnlive)

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