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मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आज़ादी के साथ ही मुसलमानों द्वारा आरक्षण की मांग की जाती रही हैं. लेकिन सरकारों ने सिर्फ चुनावी वादें के बजाय इस और धयान नहीं दिया. ये कहना मुस्लिम बुद्धिजीवियों का.

मुस्लिम बुद्धिजीवियों के अनुसार उनकी ये मांग असंवैधानिक नहीं है बल्कि इस मांग को सरकारे संविधान में संशोधन करके पूरी कर सकती हैं. इस बारें में मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि मुस्लिम आरक्षण की बात तो लगभग सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियां करती रही हैं. मगर व्यावहारिक रूप से मज़बूत कदम किसी पार्टी ने नहीं उठाया.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी ने भी अपने पिछले चुनावी घोषणापत्र में आबादी के अनुपात में मुस्लिम आरक्षण की बात कही थी मगर अमल आज तक नहीं हुआ.
कानून विशेषज्ञ के अनुसार जब 50 प्रतिशत तक आरक्षण इस देश में अन्य जातियों को मिला हुआ है तो मुसलमानों को मिलने में कोई संवैधानिक समस्या नहीं होनी चाहिए.
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