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उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत अलग अलग शहरों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के कथित छह मुस्लिम आरोपियों को निचली अदालत ने बरी कर दिया तो प्रदेश सरकार मुस्लिम युवकों को बरी करने के विरोध में हाई कोर्ट चली गयी.

गौरतलब है की ये युवक लगभग 9 वर्ष पहले ही जेल में काट चुके है. जहाँ समाजवादी पार्टी के मैनिफेस्टो में मुस्लिम युवकों की रिहाई को लेकर वादा किया गया है वहीँ सपा सरकार का ये कदम उसका मुस्लिम विरोधी चेहरा बेनकाब करता है.

राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में मुस्लिम युवकों की रिहाई को लेकर एक अपील दायर की है, गौरतलब है की अक्टूबर 2015 में हरकत-उल-जिहाद (हूजी) नामक संगठन से सम्बन्ध रखने के कोई भी पुख्ता सुबूत ना होने के कारण लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने सभी छह मुस्लिम युवकों को रिहा कर दिया था.जलालुद्दीन, नूर इस्लाम, अली अकबर हुसैन, शेख मुख़्तार हुसैन, अज़ीज़-उर-रहमान तथा नौशाद को 2007 में एसटीएफ ने हूजी से ट्रेनिंग तथा प्रदेश में आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया था.

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इन युवकों में नूर इस्लाम, अली अकबर हुसैन, शेख मुख़्तार हुसैन, अज़ीज़-उर-रहमान पश्चिमी बंगाल के तथा दो युवक यूपी के थे. कोहराम न्यूज़ में मुद्दे को लेकर पहले भी रिपोर्ट प्रकाशित की गयी थी -पढ़े.

सबसे कमाल की बात – अदालत ने कहा था की AK-47 जैसे हथियार युवकों को झूठे मुक़दमे में फ़साने के लिए प्लांट किये गए थे

इस मुकदमे को लेकर पुलिस STF तक को अदालत की झाड़ पड़ चुकी है मुकदमे की सुनाई करते हुए निचली अदालत के जज ने कहा था की “जो कुछ भी सबूत है वह केवल अभियुक्तों का इकबालिया बयान है और वह सज़ा देने के लिए काफी नहीं है। अभियोजन आरोपियों के पास से बरामदगियों को साबित करने में नाकाम रहा है। ऐसा लगता है कि अभियुक्तों के पास से एके–47 रायफल और दूसरे हथियार उन्हें झूठे मुकदमें में फंसाने के लिए प्लांट किए गए थे”।

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आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी न्यायधीश की यह टिप्पणी हकीकत बयान करने के लिए अपने आप में बहुत काफी है।अपनी जिंदगी के आठ साल जेला में बिना किसी कुसूर के बिता चुके इन मुस्लिम नौजवानों के बरी होने से सपा सरकार इस कदर दुखी है कि उसने 29 फरवरी 2016 को उच्च न्यायालय में फैसले के खिलाफ अपील दायर कर दी है । अभियुक्तों के वकील शोऐब कहते हैं, ‘सरकार मुस्लिम विरोधी गतिविधि पर काम कर रही है. वे हिन्दू वोटबैंक के चक्कर में पड़े हुए हैं. पुनर्वास तो किया नहीं, उलटा उन्हें खुली हवा में सांस भी नहीं लेने दे रहे हैं.’।

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