नई दिल्ली, 24 जनवरी। केन्द्र सरकार के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को समाप्त करने की हर कोशिश का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा और इसे भारत के मु्स्लिम छात्र बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह बात  मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑव इंडिया यानी एमएसओ के राष्ट्रीय सचिव स्तरीय सम्मेलन में उभर कर आई जिसमें देश भर के संगठन के महासचिव और राज्य सचिवों ने भाग लिया।

MSO National Council Meet

एमएसओ के राष्ट्रीय महासचिव इंजिनियर शुजात अली क़ादरी ने बताया कि बैठक में राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस हुई जिसमें अलीगढ़ के साथ-साथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के चरित्र बदलने की केन्द्र सरकार की कोशिशों की निन्दा करते हुए तय किया गया कि यदि दोनों केन्द्रीय विश्वविद्यालयों का अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा वापस लिया जाता है तो इसका हर स्तर पर विरोध किया जाता है। आपको बता दें कि यदि यह विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक दर्जे में नहीं रहते हैं तो दाख़िले और नौकरियों में मुसलमानों के पचास प्रतिशत आरक्षण की स्थिति स्वत समाप्त हो जाएगी और उस पर सामान्य नियम लागू होेगे।

 

IMG_1934 (1)एमएसओ के प्लानिंग बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मुहम्मद क़ादरी (मुंबई) ने कहाकि हाल ही में ख़बर मिली है कि ताजीकिस्तान सरकार ने लोगों को पकड़ कर उनकी दाढ़ियाँ मूँढ दी हैं जिसके पीछे दलील दी जा रही है कि यह आतंकवादियों जैसे दिखते हैं। इसी तरह स्कार्फ़, हिजाब और निक़ाब पहनी हुई महिलाओं को इस बात के लिए मजबूर किया जा रहा है कि वह पर्दे का परित्याग कर देवें। क़ादरी ने कहाकि वह ताजीकिस्तान सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करते हैं और उन्हें सलाह देते हैं कि हम भी चाहते हैं कि कट्टरता और वहाबी आतंकवाद का मुक़ाबला किया जाए लेकिन इससे लड़ने का यह तरीक़ा नहीं है। इस तरह तो ताजीकिस्तान सरकार वहाबी कट्टरवादियों की मदद ही कर रही है। एमएसओ ने ताजीकिस्तान सरकार के नाम एक ज्ञापन भारत में ताजीकिस्तान के राजदूत के नाम भेजने का निर्णय किया जिसमें कहा जाएगा कि दुशांबे को कट्टरता और वहाबी आतंकवाद से लड़ने के सूफ़ी तरीक़ों को प्रश्रय देना चाहिए जिसमें भारत के सूफ़ी ज्ञाता उनकी मदद कर सकते हैं।

संगठन के महासचिव शुजात क़ादरी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या पर शोक प्रकट करते हुए मामले की एक सदस्यीय जाँच आयोग से जाँच करवाने और पीड़ित को न्याय एवं मुआवज़ा की भी माँग की।

संगठन के उपाध्यक्ष ख़ालिद अयूब मिस्बाही (जयपुर) ने जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को बरक़रार रखने की केन्द्र सरकार से अपील करते हुए कहाकि मुसलमान देश में पहले ही पिछ़ड़ी स्थिति में हैं और यदि अल्पसंख्यक दर्जा छिनता है तो मुस्लिम और पिछड़ जाएंगे।

मुख्य वक्ता के तौर पर मुंबई रज़ा एकेडमी के प्रधान सईद नूरी ने सभा में छात्रों से अपील की कि तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम की 8 फ़रवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित सूफ़ी सभा में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को लाएँ ताकि सूफ़ीवाद के संदेश को समाज के हर तबक़े तक पहुँचाया जा सके।

सभा में ओडीशा से मौलाना नौशाद आलम मिस्बाही, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मौलाना शाहबाज़ आलम मिस्बाही, मौलाना अब्दुल कयूम मिस्बाही, असम से मईनुद्दीन रिज़वी, बरेली से आमिर रज़ा तहसीनी ने हिस्सा लिया। बैठक का समापन सलात और सलाम से किया गया। एमएसओ की अगली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 27 और 28 फ़रवरी को बंगलुरू में होगी।


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