एनडीटीवी के को फाउंडर और प्रमोटर प्रणय रॉय के घर और कार्यालय पर सीबीआई जांच को लेकर जमकर हंगामा मचा था. इस कार्रवाई को मीडिया और प्रेस की आजादी के हनन के तौर पर लिया गया था. हालांकि अब इनकम टैक्स एपीलिएट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने अपने फैसले में प्रणय रॉय को मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी में शामिल पाया है.

आईटीएटी का कहना है कि एनडीटीवी और उसके प्रमोटरों ने 2007-08 से 2009-10 के दौरान 1100 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग की थी. जिसमें से 642.54 करोड़ रुपये के काले धन आईटीएटी ने पता लगाया था. ये सूचनाएं एनडीटीवी ग्रुप से जुड़ी शेल कंपनियों के बारे में थी.

आयकर अदालत अपने आदेश में कहा ‘आईटीएटी आयकर विभाग की जांच की पुष्टि करता है.प्रणय रॉय ने एनडीटीवी की विदेशी पेपर सहायक कंपनियों के वित्तीय जानकारियों को छिपाने का प्रयास किया था. प्रणय ने लेखापरीक्षित लाभ हानि खाता, बैलेंस शीट और एनडीटीवी की वार्षिक रिपोर्ट के साथ इन विदेशी शेल कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट नहीं दी थी.’

आयकर अदालत ने कहा, ‘हमें ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि करदाता का आचरण दिखाता है कि उन्हें अपनी सब्सिडरी कंपनियों के वित्तीय लेन देन , उसके स्टेकहोल्डर और सरकारी एजेंसियों जिसमें की आयकर विभाग भी शामिल है, को दिखाने की कोई मंशा नहीं थी.

आईटीएटी ने यह भी कहा कि 8 अप्रैल 2009 को प्रणय रॉय ने विदेशी कंपनियों के वित्तीय मामलों का खुलासा न करने की एनडीटीवी को छूट के लिए कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को आवेदन किया था. जबकि मंत्रालय ने इसकी पहले ही छूट दे दी थी.


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