आज केन्‍द्र सरकार की स्‍मार्ट सिटी में हर शहर शामिल होना चा‍हता है और जिन शहरों को इसमें जगह नहीं मिली है वह नाराज दिख रहे हैं. पर अगर केन्‍द्र सरकार की मानें तो उन्‍हें खुद ही नहीं पता कि स्‍मार्ट सिटी क्‍या है और इन सिटी में क्‍या खास होता है ? जी हां आपको सोचकर थोड़ा आश्‍चर्य होगा लेकिन ये सच है.

मोदी सरकार को भी नहीं पता क्‍या है स्‍मार्ट सिटी!

शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, स्‍मार्ट सिटी का क्‍या मतलब है? सरकार का कहना है कि ये अभी तक पूरी तरह से निर्धारित नहीं है. यही नहीं दुनियाभर में भी इसके लिए कोई एक परिभाषा नहीं है. हर व्‍यक्ति के लिए इसकी परिभाषा अलग-अलग है.

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सरकार का कहना है कि आमतौर पर यहां रहने वाले लोगों के रहन-सहन, विकास और आधुनिक दौर के हिसाब से खुद को बदलने की इच्‍छा ही स्‍मार्ट सिटी का प्रारूप तैयार करता है. ये हर देश प्रारूप के हिसाब से अलग-अलग ही होती है. फिर चाहे वह भारत हो या फिर यूरोप.

गौरतलब है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने गुरुवार को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने वाले पहले 20 शहरों के नामों की घोषणा की है. इन शहरों को 2016 तक स्मार्ट सिटी बना दिया जाएगा.

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स्मार्ट सिटी के अंतर्गत विकसित किए जाने वाले शहर हैं- भुवनेश्वर (उड़ीसा), पुणे (महाराष्ट्र), जयपुर (राजस्थान), सूरत (गुजरात), कोच्चि (केरल), अहमदाबाद (गुजरात), जबलपुर (मध्य प्रदेश), विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), शोलापुर (महाराष्ट्र), देवांगिरी (कर्नाटक), इंदौर (मध्य प्रदेश), नई दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (एनडीएमसी, दिल्ली), कोयंबटूर (तमिलनाडु), काकीनाडा (आंध्र प्रदेश), बेलागावी (कर्नाटक), उदयपुर (राजस्थान), गुवाहाटी (असम), चेन्नई (तमिलनाडु), लुधियाना (पंजाब) और भोपाल (मध्य प्रदेश).

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