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सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच सर्जिकल स्ट्राइक के सबूतों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया हैं.  केंद्र की मोदी सरकार आतंकियों के खिलाफ पीओके में की गई सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत सार्वजनिक नहीं करेंगी.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार,  सरकार से जुडे़ बड़े सूत्रों का कहना है कि युद्ध में भारत की कोई रूचि नहीं है. लेकिन अगर फिर भी युद्ध के हालात बनते हैं तो भारत लड़ने और जीतने के लिए तैयार है. सर्जिकल स्ट्राइक पर भारत की राजनयिक सफलता को बताते हुए कहा गया कि किसी भी देश ने भारत के इस एक्शन का विरोध नहीं किया है.

चीन का हवाला देते हुए आगे कहा गया कि पाकिस्तान के सबसे करीबी माने जाने वाले चीन ने भी इस मामले पर कोई विरोध दर्ज नहीं किया. इतना ही नहीं इस्लामिक देशों ने भी इस कार्रवाई पर भारत की पीठ थपथपाई है. रिपोर्ट में कहा गया कि सेना की सर्जिकल स्ट्राइक से पहले अमेरिका को सरकार ने कोई सूचना नहीं दी थी.

इसके अलावा गणतंत्र दिवस समारोह में अबुधाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहान को बुलाना भी पाक के खिलाफ भारत की एक कुटनीतिक चाल बताया गया हैं.


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