नई दिल्ली | ‘अच्छे दिनों’ के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार अपने तीन साल पुरे करने जा रही है. 26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी ने अपनी कैबिनेट के साथ शपथ ली थी. जहाँ बीजेपी दावा कर रही है की मोदी सरकार ने पीछले तीन सालो में देश की तस्वीर बदल कर रख दी है वही आंकड़े इस बात की गवाही देने से मना कर रहे है. इन तीन सालो में अगर रोजगार सर्जन की बात करे तो मोदी सरकार ने सबको निराश किया है.

श्रम मंत्रालय के आंकड़ो के अनुसार मोदी सरकार , रोजगार पैदा करने के मामले में मनमोहन सरकार से बेहद पीछे है. जहाँ मनमोहन सरकार ने 2009 में 10 लाख नौकरिया पैदा की थी वहां मोदी सरकार पिछले तीन सालो में भी इतनी नौकरी पैदा नही कर सकी. यही नही 2015 में तो पीछले आठ साल के दौरान सबसे कम रोजगार सर्जित हुए. यह मोदी सरकार के उस वादे के बिलकुल उलट है जो उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान किये थे.

मोदी ने वादा किया था की वो हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करेंगे. लेकिन अगर 2013 में देखा जाए तो इस साल 4.19 लाख नौकरी तैयार हुई थी. इसके अगले साल जब मोदी सरकार ने काम काज संभाला तो इन आंकड़ो में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई. इस साल 4.21 नौकरिया तैयार हुई. लेकिन अगले दो सालो में क्रमशः 1.35 और 2.31 लाख नौकरिया तैयार हुई.

फ़िलहाल देश में बेरोजगारों की संख्या दिन पर दिन बढती जा रही है. एक आंकड़े के मुताबिक साल 2020 तक भारत को हर साल करीब 2 करोड़ रोजगार पैदा करने होंगे तब जाकर स्थिति में कुछ सुधार आएगा. अभी स्थिति इसलिए भी भयावह है क्योकि देश को सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला आईटी क्षेत्र भी लगातार छटनी कर रहा है जिसकी वजह से बेरोजगारी और बढ़ रही है. इसके अलावा आने वालो सालो में भी इस स्थिति में सुधार की कोई सम्भावना नही है.


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