New Delhi: Prime Minister Narendra Modi is presented a bouquet during a meeting with a delegation from the Muslim community, led by Imam Umer Ahmed Ilyasi in New Delhi on Tuesday. PTI Photo (PTI6_2_2015_000198B)

सबका साथ-सबका विकास की बात करने वाली मोदी सरकार के राज में आज़ादी के बाद पहली बार देश का अल्प्संखयक मुस्लिम समुदाय सबसे भयावह दौर से गुजर रहा है. ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार को ने केवल अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए बल्कि उनमे विश्वास भी पैदा करना चाहिए. बावजूद इसके संसदीय अल्पसंख्यक सलाहकार समिति को देश के अलग-अलग हिस्‍सों में जुनैद की तरह मारे गए लोगों को मोदी सरकार ने श्रद्धांजलि नहीं देने दी.

एएनआई के अनुसार, बीफ खाने के शक में ट्रेन में जुनैद की हत्‍या से लेकर देश के अलग-अलग हिस्‍सों में हुईं घटनाओं पर संसदीय समिति श्रद्धांजलि देना चाहती थी. समिति के 6 सदस्‍यों ने इसकी इच्‍छा जाहिर की मगर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी इस पर सहमत नहीं हुए. जिसके बाद उन 6 सदस्‍यों ने संसद परिसर में हुई बैठक का बहिष्‍कार कर दिया.

नकवी ने गुरुवार को इस बात को खारिज कर दिया कि देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पनपी है. उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा, “मुझे नहीं लगता कि अल्पसंख्यकों में डर या असुरक्षा की भावना है.”

उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में स्वघोषित गो-रक्षकों द्वारा की जा रही हिंसा की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए कहा, “लेकिन जो कुछ भी हो रहा है, चाहे व आपराधिक कृत्य हो या आपराधिक साजिश, उसे किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.


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