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नई दिल्ली | जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा की आज से देश में 500 एवं 1000 के नोट नही चलेगे , तो एक बारगी लगा की अब कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकेगी. लेकिन अगले ही पल खबर मिली की मोदी सरकार केवल पुराने 500 एवं 1000 के नोट बंद कर रही है, करेंसी नही. मोदी सरकार अब देश में 2000 की करेंसी की शुरुआत करने जा रही है. 10 नवम्बर से 2000 और 500 के नए नोट मिलने शुरू हो जायेंगे.

मोदी की घोषणा के बाद पुरे सोशल मीडिया में यह खबर आग की तरफ फैली. मोदी भक्तो ने , मोदी सरकार के इस कदम को सर्जिकल स्ट्राइक के साथ जोड़ते हुए लिखा की अब कालेधन पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक. मोदी ने चला कालेधन के खिलाफ मास्टर स्ट्रोक. लेकिन क्या इस कदम से भारत का कालाधन बाहर आ जायेगा? क्या अब सरकार बता सकेगी की किसके पास कितना काला धन है? और क्या इस कदम से देश में भ्रष्टाचार में कमी आएगी?

इन सब सवालों का जवाब इस बात से समझा जा सकता है की देश में 500 और 1000 की करेंसी का फ्लो , छोटी करेंसी के मुकाबले 90 फीसदी है. केवल 10 फीसदी ही छोटी करेंसी देश में विचरण करती है. जब देश में 500 और 1000 के नोट की शुरुआत हुई थी तब कई अर्थशास्त्रियो ने इसे देश में कालेधन और भ्रष्टाचार बढ़ने का सूचक करार दिया था. 2000 नोट को जारी करना क्या भ्रष्टाचार और कालेधन पर वार है या मोदी सरकार को इन दोनों चीजो से प्यार है? आइये जानते है.

2000 का नोट भविष्य में और कालेधन को देगा जन्म 

तो क्या 2000 का नोट देश से कालाधन और भ्रष्टाचार खत्म कर देगा? आप खुद इतने समझदार है. मोदी सरकार का यह कदम केवल देश में छिपे कालेधन को बाहर कर सकता है, जो की मात्र में बहुत थोडा है लेकिन जो कालाधन विदेशो में छिपा हुआ है उस पर इस कदम का कोई प्रभाव नही पड़ेगा. लेकिन जितना कालाधन देश के अन्दर से रिकवर किया जाएगा , उतनी ही जल्दी यह देश में फिर बढेगा. यह कदम आंशिक तौर पर कारगर हो सकता है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम काफी खतरनाक साबित हो सकते है.

केवल 100 का नोट देश से कम करता भ्रष्टाचार 

2000 नोट को जारी करने से लोगो के पास अधिक कालाधन रखने में काफी सुविधा होगी. समझ नही आ रहा की अगर मोदी सरकार अगर 500 और 1000 के नोट को पूरी तरह बंद करके देश में केवल 100 के नोट जारी रखती तो इससे क्या देश में क्या भ्रष्टाचार कम नही होता? खेर वो तो मोदी जी ही बता सकते है की उन्होंने ऐसा क्यों नही किया?

हाल ही में जारी किये गए थे नए 500 और 1000 के नोट 

इसके अलावा एक और सवाल उठता है की आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अभी हाल में 500 और 1000 के नए नोट जारी किये थे. अभी हमारे पास यह आंकड़ा नही है की ऐसे कितने नोट नए छापे गए है और इनमे कितना खर्चा आया है लेकिन इतना तय है की इन नोट को बनाने में काफी खर्चा आया होगा जो अब कूड़े के ढेर में जा चुके है. इसके अलावा नए नोट छापने में भी सरकार का काफी खर्च आया होगा. इसका मतलब, जो नया 500 और 2000 का नोट आपके हाथ में आएगा उसकी छपाई में आने वाला खर्च दुगना होगा.

मोदी सरकार का यह कदम जल्दबाजी में लिया गया कदम 

अगर सरकार नए नोट चलाने का मन पहले ही बना चुकी थी तब सरकार को नए 500 और 1000 के नोट नही छापने चाहिए थे. इतने खर्चे में सरकार अब चालू होने वाले सभी 500 और 2000 के नोट छाप सकती थी. यह सब इस और इशारा कर रहा है की मोदी सरकार का यह निर्णय काफी जल्दबाजी में लिया गया है. या फिर इसके पीछे भी कोई राज है? जल्द ही इसका भी खुलासा हो जाएगा.


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