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केंद्र में मोदी सरकार ने अडानी ग्रुप पर लगे  200 करोड़ के जुर्माने को रद्द कर दिया हैं. अडानी पोर्ट एंड सेज परियोजना के कारण स्थानीय पारिस्थितिकी को बड़े पैमाने पर हुए नुकसान के चलते यह जुर्माना लगाया गया था. यह जुर्माना यूपीए सरकार के समय लगाया गया था जो की अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना था.

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात के मुंदड़ा में अडानी वॉटरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए 2009 में जारी पर्यावरण मंजूरी का भी विस्तार सहित परियोजना पर पूर्ववर्ती सरकार के समय लगाई गई कई सख्त शर्तें भी वापस ले ली हैं. 700 हेक्टेयर जमीन पर बन रहे अडानी वॉटरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में चार पोर्ट, कंटेनर टर्मिनल, यार्ड, एक रेल संपर्क के साथ कई अन्य तरह के निर्माण शामिल हैं.

2012 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मुंदड़ा प्रोजेक्ट से पर्यावरण को हुए नुकसान के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई समिति ने अपनी रिपोर्ट में नियमों के उल्लंघन, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को हुए व्यापक नुकसान और अवैध तरीके से जमीन लेने जैसी बातों को सामने रखा था और पर्यावरण नुकसान की व्यापकता को देखते हुए परियोजना के उत्तरी पोर्ट पर प्रतिबंध लगाने और क्षतिपूर्ति के लिए परियोजना लागत का एक प्रतिशत या 200 करोड़ रुपये, जो भी अधिक हो, वसूलने की सिफारिश की थी.

आरटीआई के तहत मंत्रालय के 2012 से लेकर 2016 तक के दस्तावेजों को देखने वाले दिल्ली स्थित संगठन सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च से जुड़े कांची कोहली का कहना है कि मंत्रालय के नवनियुक्त अधिकारियों ने अडानी पोर्ट एंड सेज परियोजना में पर्यावरण नुकसान और नियमों के उल्लंघन की पुरानी शिकायतों को पूरी तरह पलट दिया है. अधिकारियों ने कहा है कि सेटेलाइट डेटा से परियोजना के आस-पास मैंग्रोव्स को हुए नुकसान की पुष्टि होती है लेकिन इससे परियोजना को दोषी ठहराने के सबूत नहीं मिलते हैं.

अधिकारियों के इसी निष्कर्ष को स्वीकार करते हुए जावड़ेकर ने 200 करोड़ रुपये के जुर्माने को खारिज करने का फैसला किया.


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