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नई दिल्ली | पिछले कुछ महीनो से मोदी सरकार खूब सुर्खियों में है. पहले पाक अधिकृत कश्मीर में सेना की सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर और अब नोट बंदी को लेकर. सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर मोदी सरकार पर आरोप लगा की उन्होंने सेना को राजनितिक फायदा लेने के लिए इस्तेमाल किया. नोट बंदी का फैसला लेने के बाद , सरकार को कठघरे में खड़ा किया क्योकि इस फैसले से पुरे देश में अफरा तफरी मच गयी.

पिछले दो महीनो से मोदी सरकार के लिए हलचलों का दौर रहा है. लेकिन मीडिया में आई एक खबर ने मोदी सरकार को एक बार फिर सवालो के घेरे में खड़ा किया है. मिली जानकारी के अनुसार मोदी सरकार ने पिछले सत्ता में आने के बाद 11 अरब रूपए प्रचार में बर्बाद किये है. यह खबर मोदी सरकार के माथे पर सिकन ला सकती है क्योकि जनता के पैसे को इस तरह बर्बाद करने के ऊपर मोदी सरकार से सवाल किये जा सकते है.

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नोयडा के एक आरटीआई एक्टिविस्ट रामवीर ने सूचना प्रसारण मंत्रालय से आरटीआई के जरिये ब्यौरा माँगा था की मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद कितनी रकम प्रचार में खर्च की है. जो डाटा सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस आरटीआई के जवाब में भेजा वो बहुत चौकाने वाला था. इस आरटीआई से पता चला की सरकार ने पिछले दो सालो में 11 अरब 11 करोड़ 78 लाख रूपए प्रचार में फूंके है.

मालुम हो की लोकसभा चुनावो के दौरान भी बीजेपी ने प्रचार में कोई कोर कसर नही छोड़ी थी. हर जगह बीजेपी के पोस्टर दिखाई देते थे. 50-50 करोड़ रूपए की रेलिया आयोजित की गयी. विरोधी बीजेपी पर आरोप लगाते है की उन्होंने चुनाव प्रचार में करीब 1 हजार करोड़ रूपए फूंके थे. चूँकि वो पार्टी का पैसा था इसलिए किसी को इस पर कोई एतराज नही हो सकता लेकिन सरकार जो पैसा प्रचार में फूंक रही है वो जनता का पैसा है इसलिए सवाल उठाना लाजिमी है.


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