नई दिल्ली. अल्पसंख्यक तबक़े से ताल्लुक़ रखने वाले छात्रों के तालीम का एक बड़ा सहारा उनको मिलने वाली स्कॉलरशिप होती है। शायद सरकार का भी यही मक़सद रहा है कि अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ अल्पसंख्यक तबक़े के छात्र-छात्राओं को भी पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मुहैया कराई जाए। ताकि उनकी पढ़ाई में आने वाली आर्थिक परेशानी को दूर किया जा सके। यह सच भी है कि देश के ऐसे हज़ारों अल्पसंख्यक छात्र सरकार के इसी स्कॉलरशिप के सहारे अपनी तालीम पूरी कर अपने पैरों पर खड़े हो सके हैं।

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मगर इन दिनों ‘सबका साथ –सबका विकास’ का दावा करने वाली मोदी सरकार ने इस ‘सहारे’ पर भी चोट करना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार के इस शासन में न सिर्फ़ अल्पसंख्यक छात्रों को स्कॉलरशिप बांटने की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है, बल्कि अल्पसंख्यक बच्चों को मिलने वाले स्कॉलरशिप के बजट को भी इस नए वित्तीय वर्ष में घटा दिया गया है।

सरकार अल्पसंख्यक छात्रों के शैक्षिक बदहाली को दूर करने की नियत रखते हुए प्रमुख तौर पर तीन स्कॉलरशिप स्कीम इस देश में चला रही है। पहला प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप और तीसरा मेरिट कम मिन्स स्कॉलरशिप। इन तीनों स्कॉलरशिप को लेकर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के दावे काफी ज़बरदस्त रहे हैं। सरकार का दावा है कि साल 2014-15 में पूरे भारत में 86 लाख प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप बांटी गई हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार के बजट में मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रों के स्कॉलरशिप पर जमकर कैंची चलाई है।

अल्पसंख्यक छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्कॉलरशिप यानी प्री-मैट्रिक मैट्रिक स्कॉलरशिप का बजट साल 2015-16 में 1040.10 करोड़ रखा गया था, लेकिन इस बार के प्रस्तावित बजट में इसे 931 करोड़ कर दिया गया है। यही कहानी पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप की भी है। पिछले साल यानी 2015-16 में इस स्कॉलरशिप के लिए 580.10 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इस बार इसे घटाकर 550 करोड़ कर दिया गया है। यदि आंकड़ों की बात करें तो दस्तावेज़ बताते हैं कि साल 2015-16 में प्री-मैट्रिक मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए 1040.10 करोड़ का बजट रखा गया, लेकिन जून 2015 तक इसके नाम पर सिर्फ़ 0.02 करोड़ ही खर्च किया जा सका है। (Two Circle)


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