नई दिल्ली, चोरी की हद है की इस चेयर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इलेक्ट्रिकल engineering के छात्र सुल्तान हैदर जिसने १९९७ में ही इस चेयर का निर्माण कर लिया था जिसे देश में दाखिला न मिलने के कारण जर्मन का रुख करना पड़ा था , उसकी इस रिसर्च के बारे में पायनियर अखबार मे खूब छपा था.

इस चेयर की खबर इस प्रकार है कि विज्ञानियों ने मांसपेशियों पर नियंत्रण और चलने-फिरने की क्षमता खो चुके विकलांगों के लिए ऐसी व्हीलचेयर विकसित की है, जो मस्तिष्क से नियंत्रित होकर चलेगी। इस व्हील चेयर का नाम है ‘माइंड कंट्रोल्ड व्हील चेयर’, जिसे अपने ही देश में बनाया गया है।
सेंसर युक्त यह व्हील चेयर (पहिये लगी स्पेशल कुर्सी) इस पर बैठने वाले के दिमाग के निर्देशों से मूव करेगी। यह व्हील चेयर ए स्कूल ऑफ इलेक्ट्रानिक टेक्नोलॉजी (ए-सैट) द्वारा तैयार की गई है। स्कूल के रोबोटिक्स एंड रिसर्च हेड दिवाकर वैश्य ने बताया कि ‘माइंड कंट्रोल्ड व्हील चेयर’ में कई तरह के सेंसर का उपयोग किया गया है। इस ‘माइंड कंट्रोल्ड व्हील चेयर’ को ऑपरेट करने के लिए हेड फोन की तरह एक उपकरण तैयार किया गया है, जिसमें माइंड मैपिंग ब्रेन सेंसर लगाया गया है।
इसे जैसे ही चेयर पर बैठे व्यक्ति को पहनाया जाएगा, सेंसर उसके दिमाग को पढ़ेगा और चेयर उसी दिशा में मूव करेगी। उल्लेखनीय है कि इस ‘माइंड कंट्रोल्ड व्हील चेयर’ को तैयार करते समय चेयर और माइंड मैपिंग सेंसर को कनेक्ट किया गया है। व्हील चेयर को दिन में दो घंटे चार्ज करना पड़ता है। इसे ‘मेड इन इंडिया’ के तहत भारत में ही तैयार किया गया है।
ब्रेन सेंसर और व्हीलचेयर की कीमत लगभग दो लाख रुपये होगी। ए-सैट के रोबोटिक्स एंड रिसर्च हेड दिवाकर वैश्य ने बताया कि व्हील चेयर खरीदने से पहले व्यक्ति की हालत सेंटर को बताना जरूरी होगा, जिससे ‘माइंड कंट्रोल्ड व्हील चेयर’ के सही उपयोग और अन्य खूबियों की जानकारी भी मिलेगी। दिवाकर वैश्य ने कहा कि सभी अंगों के पक्षाघात या मस्तिष्क के न्यूरांस के मृत हो जाने (एमिट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) से आई विकलांगता के शिकार लोगों के लिए नई खोज बेहतर सहायक सिद्ध हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए पलक झपकाना तक संभव नहीं हो पाता।
उनके लिए ईईजी डिवाइस पर्याप्त लाभकारी साबित हो सकती है। इसमें सिर पर लगे इलेक्ट्रोड से मस्तिष्क की तरंगों की मॉनिटरिंग की जाती है। यहां तक कि आपातकालीन स्थिति में भी यह ‘माइंड कंट्रोल्ड व्हील चेयर’ बखूबी काम करेगी। आईआईटी के सिडबी इन्नोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर में पिछले दिनों बायो इन्क्यूबेशन का शुभारंभ किया गया। इसमें बायोरैक (बायो रिसर्च असिस्टेंट काउंसिल) और आईआईटी के बीच टाईअप हुआ है। इसमें बायो इंडस्ट्री के क्षेत्र में नये इन्नोवेटिव आइडिया पर रिसर्च काम होगा। (januday)


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